
सासाराम: ऐतिहासिक शेरशाह सूरी के मकबरे परिसर स्थित तालाब में भारी मात्रा में मछलियों के मरने का मामला सामने आया है। बड़ी संख्या में मछलियों की मौत के बाद तालाब के पानी की गुणवत्ता और साफ-सफाई की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
मछलियों की मौत का कारण तालाब के पानी के दूषित होने की आशंका जताई जा रही है। मछली पालन से जुड़े संवेदक दीना चौधरी के मुताबिक, इस बार करीब 8 से 10 क्विंटल मछलियां मर गई हैं। इससे उन्हें लगभग 4 से 5 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है।
संवेदक का कहना है कि यह समस्या पहली बार नहीं हुई है। करीब छह महीने पहले भी तालाब में बड़ी संख्या में मछलियां मर गई थीं। पिछले एक साल में तीन से चार बार ऐसी स्थिति बन चुकी है। उनका दावा है कि पहले नहर के जरिए तालाब में साफ पानी आता था और गंदा पानी बाहर निकल जाता था, लेकिन पिछले कई वर्षों से यह व्यवस्था बंद है।
नहर व्यवस्था ठप होने के कारण गंदा पानी तालाब में जमा होने लगा है। इसी वजह से पानी की गुणवत्ता प्रभावित होने और मछलियों की मौत होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के सहायक संरक्षक अमृत झा ने फोन पर बताया कि पानी फिल्टर नहीं होने की वजह से समस्या उत्पन्न हो रही है।
लगातार मछलियों की मौत से जहां मछली पालन से जुड़े लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं ऐतिहासिक स्थल की साफ-सफाई और पर्यावरणीय स्थिति को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। तालाब के दूषित पानी से मकबरे का भ्रमण करने पहुंचने वाले पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय स्तर पर अब मांग उठ रही है कि संबंधित विभाग तालाब के पानी की गुणवत्ता की जांच कराकर जल निकासी और स्वच्छ पानी की व्यवस्था को दुरुस्त करे। स्थायी समाधान नहीं होने पर भविष्य में भी मछलियों की मौत की घटनाएं दोहराए जाने की आशंका बनी रहेगी।






