गोताहर स्कूल में 723 बच्चे, पढ़ाई के लिए महज पांच कमरे
723 children in Gotahar school, but only five classrooms for studies.

रोहतास। बिहार में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने और मॉडल स्कूलों के विकास की कोशिशों के बीच रोहतास जिले के उत्क्रमित मध्य विद्यालय, गोताहर में बुनियादी सुविधाओं की कमी सामने आई है। विद्यालय में 723 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई के लिए केवल पांच कमरे उपलब्ध हैं। कमरों की कमी के कारण एक ही कमरे में दो-दो और तीन-तीन कक्षाएं संचालित करनी पड़ रही हैं।

बुधवार को रोहतास के जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा ने क्षेत्र के मॉडल स्कूल का निरीक्षण किया। इसी बीच गोताहर स्थित सरकारी विद्यालय की स्थिति ने शिक्षा व्यवस्था में आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

GNSU Admission Open 2026

विद्यालय के प्रधानाध्यापक आशुतोष कुमार के अनुसार, स्कूल में कुल छह कमरे हैं। इनमें से एक कमरे का इस्तेमाल सरकारी अभिलेखों और जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। इस कारण विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई के लिए केवल पांच कमरे ही बचते हैं।

एक कमरे में कई कक्षाओं का संचालन

कमरों की कमी के चलते विद्यालय में विद्यार्थियों को एक साथ बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है। प्रधानाध्यापक के मुताबिक, कुछ कमरों में 140 से अधिक बच्चे बैठते हैं। कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखने के लिए एक ही कमरे में दो या तीन कक्षाओं का संचालन किया जाता है।

इस व्यवस्था के कारण शिक्षकों को अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वहीं, सीमित जगह और एक साथ चलने वाली कक्षाओं के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।

नए भवन के लिए कई बार किया गया पत्राचार

प्रधानाध्यापक आशुतोष कुमार ने बताया कि विद्यालय में अतिरिक्त कमरों और नए भवन के निर्माण की आवश्यकता को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कई बार पत्र लिखा गया है। हालांकि, उनके अनुसार अब तक इस संबंध में आश्वासन के अलावा कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में पर्याप्त कक्ष उपलब्ध नहीं होने से शिक्षण व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में विद्यालय के लिए अतिरिक्त भवन और कक्षों की व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि मॉडल स्कूलों के विकास के साथ-साथ सामान्य सरकारी विद्यालयों की बुनियादी जरूरतों पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है, ताकि सभी विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।