Ravneet Bittu attacks Congress on nepotism: If the party were truly democratic, no one would have left it.

नयी दिल्ली: संसद परिसर में गुरुवार को उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया, जब केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच तीखी जुबानी जंग देखने को मिली। विवाद की शुरुआत राहुल गांधी की उस टिप्पणी से हुई, जिसमें उन्होंने बिट्टू को “गद्दार” कहा। इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए रवनीत बिट्टू ने कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी अब “असली कांग्रेस” नहीं रह गई है।

एएनआई से बातचीत में रवनीत बिट्टू ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस इसलिए छोड़ी क्योंकि पार्टी पूरी तरह परिवारवाद की गिरफ्त में आ चुकी थी। उन्होंने कहा, “जब हम कांग्रेस में थे, तब पार्टी के लिए सीटें जीतते थे। हम कभी बोझ नहीं रहे। लेकिन जब साफ हो गया कि पार्टी सिर्फ एक परिवार तक सिमट गई है, तब लोग उसे छोड़ने लगे। अगर यह असली कांग्रेस होती, तो कोई भी पार्टी नहीं छोड़ता।” बिट्टू 2024 में कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे।

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बिट्टू ने राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि अगर कांग्रेस वास्तव में लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करती, तो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी खुद संसद में विरोध के दौरान आगे बढ़कर कार्रवाई का सामना करते। उन्होंने राहुल गांधी को “देश का दुश्मन” तक करार दिया, जिससे बयानबाजी और तेज हो गई।

इस बीच, भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने भी राहुल गांधी की टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे सिख समुदाय का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान न सिर्फ संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के भी खिलाफ हैं। पाल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के रवैये के कारण राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चार दिनों तक होने वाली चर्चा बाधित हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, संसद के बाहर राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू से हाथ मिलाने की कोशिश करते हुए व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “नमस्ते भाई, मेरे गद्दार दोस्त।” हालांकि बिट्टू ने हाथ मिलाने से इनकार कर दिया और पलटवार करते हुए राहुल गांधी पर देशविरोधी मानसिकता का आरोप लगाया।

इस पूरे घटनाक्रम ने संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक तनाव को और गहरा कर दिया है, वहीं दोनों दलों के बीच बयानबाजी थमने के कोई आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं।