राजनांदगांव: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव शहर में बिजली आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों के निराकरण को लेकर पर्याप्त कर्मचारियों की कमी और कॉल सेंटर की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि 65 हजार से अधिक उपभोक्ताओं वाले शहर में तीन टेलीफोन लाइनों को संभालने के लिए एक समय में केवल एक ऑपरेटर तैनात रहता है।
विभागीय आंकड़ों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, राजनांदगांव शहरी संभाग के टाउन-1 और टाउन-2 में करीब 65 हजार से 70 हजार घरेलू, व्यावसायिक और लघु औद्योगिक उपभोक्ता हैं। इनसे हर महीने औसतन 18 से 22 करोड़ रुपये का बिजली राजस्व मिलने का दावा किया गया है।
स्थानीय उपभोक्ताओं के अनुसार बिजली गुल होने या तकनीकी खराबी की शिकायत दर्ज कराने के दौरान कई बार फोन लाइन व्यस्त मिलती है। कॉल सेंटर में तैनात ऑपरेटर को उपभोक्ता का नाम, पता, उपभोक्ता क्रमांक और समस्या दर्ज करने के साथ संबंधित फील्ड टीम या लाइनमैन को सूचना भी देनी होती है। ऐसे में एक साथ कई कॉल आने पर शिकायत दर्ज कराने में समय लगने की बात कही जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, लाइनमैन और सहायक लाइनमैन के पदों पर नियमित भर्ती नहीं होने से मैदानी तकनीकी अमले की कमी बनी हुई है। कई अनुभवी कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि उपभोक्ताओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। फॉल्ट सुधार और रखरखाव के लिए ठेका कर्मचारियों की सेवाएं भी ली जा रही हैं।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि उपलब्ध मैदानी अमला जरूरत के मुकाबले कम है। इसके अलावा फॉल्ट सुधार के लिए जरूरी संसाधनों, सुरक्षा उपकरणों और वाहनों की सीमित उपलब्धता के कारण कुछ मामलों में बिजली बहाली में अधिक समय लग जाता है। खासकर रात के समय ट्रांसफार्मर, पोल या बिजली लाइन में खराबी आने पर कई घंटे तक आपूर्ति प्रभावित रहने की शिकायतें सामने आती हैं।
ऐसे में शहर में कॉल सेंटर में अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती और मैदानी तकनीकी अमले को मजबूत करने की मांग उठ रही है, ताकि बिजली संबंधी शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा में प्रभावी ढंग से निराकरण हो सके।








