
भुवनेश्वर। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा है कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से जारी महानदी जल बंटवारे का विवाद समाधान के करीब पहुंच गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस संबंध में अंतिम रूपरेखा घोषित की जाएगी और दोनों राज्यों के बीच होने वाला समझौता अन्य राज्यों के लिए अंतरराज्यीय विवादों के समाधान का मॉडल बनेगा।
माझी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में शामिल होने के बाद यह जानकारी दी। बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बैठक सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई। ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों ने महानदी जल विवाद के समाधान के लिए केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के किसी भी निर्णय का पालन करने पर सहमति जताई है।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, माझी ने दोनों राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकालने की उम्मीद व्यक्त की। उन्होंने महानदी को ओडिशा की जीवनरेखा बताते हुए कहा कि नदी का पानी राज्य के करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है।
बैठक में माझी ने सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, जलविद्युत उत्पादन, पेयजल आपूर्ति और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने ओडिशा के लिए पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य सरकारें विकास के साथ-साथ अंतरराज्यीय विवादों के समाधान की दिशा में भी प्रयास कर रही हैं। उनके अनुसार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने के बाद महानदी विवाद के समाधान की प्रक्रिया में तेजी आई है।
माझी ने बताया कि दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच जुलाई-अगस्त 2025 में चर्चा हुई थी। इसके अलावा दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों और जल संसाधन सचिवों के स्तर पर भी कई बैठकें आयोजित की गईं। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के साथ प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भी समाधान के रास्ते तलाशे जा रहे हैं।
इस बीच, ओडिशा में विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने दिल्ली में हुई बैठक के निर्णयों को सार्वजनिक करने की मांग की। बीजद विधायक अरुण कुमार साहू ने कहा कि बैठक केवल औपचारिकता बनकर नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि केंद्र और दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार होने के बावजूद लंबे समय से जारी विवाद का अब तक समाधान क्यों नहीं हुआ।






