कर्नाटक में वोटर लिस्ट विवाद: 91 हजार से अधिक फॉर्म-7 आवेदन, SIT जांच पर विचार
Karnataka voter list dispute: Over 91,000 Form-7 applications filed, SIT probe under consideration

बेंगलुरु: कर्नाटक में मतदाता सूची से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाने के प्रयासों की जांच के लिए राज्य सरकार विशेष जांच दल (SIT) गठित करने पर विचार कर रही है। आरोप है कि मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के जरिए संदिग्ध आवेदन जमा किए गए। इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा तथा जनता दल (सेक्युलर) के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बेल्लारी, बेंगलुरु, बीदर, बेलगावी, चिकमगलूर, दक्षिण कन्नड़, मैसूर, विजयपुरा और उडुपी जिलों में इस मामले को लेकर नौ प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। प्रस्तावित SIT यह जांच कर सकती है कि क्या इन मामलों के पीछे कोई संगठित साजिश थी और क्या फर्जी आवेदनों के माध्यम से वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई।

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91,278 आवेदन मिलने का दावा

मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अम्बु कुमार के अनुसार, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान दावों और आपत्तियों की अंतिम तिथि 24 सितंबर तक नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के कुल 91,278 आवेदन प्राप्त हुए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन आवेदनों के आधार पर अब तक किसी भी मतदाता का नाम नहीं हटाया गया है।

निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (ERO) को कार्रवाई से पहले आवेदकों की पहचान और प्रत्येक मामले की परिस्थितियों का सत्यापन करने का निर्देश दिया गया है। चुनाव आयोग ने फर्जी सामूहिक आवेदनों के मामलों में शिकायत दर्ज कराने को भी कहा है।

कांग्रेस और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच पहले से छपे फॉर्म-7 बांटकर मतदाता सूची में हेरफेर की साजिश रची गई। उनका दावा है कि इसका उद्देश्य अल्पसंख्यक, अनुसूचित जनजाति, दलित, पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के वास्तविक मतदाताओं को निशाना बनाना था। ये आरोप फिलहाल जांच के अधीन हैं।

वहीं, भाजपा और जद(एस) ने आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस सरकार पर आपत्तियां दर्ज कराने वालों के खिलाफ पुलिस का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। विपक्ष ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत और मुख्य निर्वाचन अधिकारी से भी संपर्क किया है।

आलंद मामले से संभावित संबंधों की जांच

राज्य सरकार यह भी पता लगाने की संभावना तलाश रही है कि मौजूदा विवाद का संबंध कलबुर्गी जिले के आलंद विधानसभा क्षेत्र के मामले से है या नहीं। वहां सीआईडी की SIT वर्ष 2022-23 के दौरान 5,994 मतदाताओं के नाम कथित रूप से अवैध तरीके से हटाने की साजिश की जांच कर रही है।

चुनाव अधिकारियों ने दोहराया है कि केवल फॉर्म-7 जमा करने से किसी मतदाता का नाम अपने आप नहीं हटता। नाम हटाने से पहले निर्धारित सत्यापन और जांच प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है।