नयी दिल्ली: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली, कर्मचारियों की कमी और परीक्षा की सुरक्षा को लेकर संसद की स्थायी समिति ने गंभीर सवाल उठाए हैं। समिति ने एजेंसी में जवाबदेही बढ़ाने, स्थायी विशेषज्ञ कर्मचारियों की भर्ती करने, निजी ठेकेदारों पर निर्भरता घटाने और प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका रोकने के लिए व्यापक सुधारों की सिफारिश की है। कांग्रेस ने इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए एनटीए की व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है।
कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि समिति ने एनटीए की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने और उसे जवाबदेह बनाने के लिए उचित व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई है। राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी स्थायी समिति ने अपनी 382वीं रिपोर्ट राज्यसभा के सभापति को सौंपी थी।
एनटीए में 41 प्रतिशत पद खाली
समिति की रिपोर्ट के अनुसार, एनटीए में स्वीकृत 39 पदों में से केवल 23 पर अधिकारी कार्यरत हैं, जबकि 16 पद खाली हैं। इस तरह करीब 41 प्रतिशत पद रिक्त हैं। समिति ने कहा कि कर्मचारियों की कमी से एजेंसी के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उसने सभी स्वीकृत पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने की सिफारिश की है।
रिपोर्ट में एनटीए के संगठनात्मक ढांचे, संसाधनों और जवाबदेही व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। समिति का मानना है कि एजेंसी में स्थायी और विशेषज्ञ कर्मचारियों की नियुक्ति की जानी चाहिए, ताकि सीमित अवधि के लिए प्रतिनियुक्ति पर आने वाले अधिकारियों पर निर्भरता कम हो सके।
परीक्षा केंद्रों और सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव का सुझाव
समिति ने परीक्षा केंद्रों के संचालन में निजी ठेकेदारों पर निर्भरता घटाने और केंद्र तथा राज्य सरकारों के अधीन उपलब्ध परीक्षा केंद्रों का उपयोग बढ़ाने की सिफारिश की है। परीक्षा संबंधी सेवाएं देने वाली प्रतिबंधित कंपनियों और उनसे जुड़े व्यक्तियों की जानकारी रखने के लिए राष्ट्रीय रजिस्ट्री बनाने का सुझाव भी दिया गया है।
प्रश्नपत्र लीक की आशंका कम करने के लिए समिति ने व्यापक और लगातार अपडेट होने वाला प्रश्न बैंक तैयार करने की बात कही है। साथ ही, कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं में प्रश्नपत्र परीक्षा के नजदीक तैयार करने की व्यवस्था अपनाने पर जोर दिया गया है।
NEET-UG को कंप्यूटर आधारित बनाने की सिफारिश
समिति ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) को पेन-पेपर के बजाय कंप्यूटर आधारित प्रारूप में आयोजित करने की सिफारिश की है। इसके लिए सरकारी परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त तकनीकी और बुनियादी सुविधाएं विकसित करने की जरूरत बताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च शिक्षा विभाग ने समिति को बताया कि 2017 से 2025 के बीच एनटीए की किसी परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ। हालांकि, समिति ने यह भी उल्लेख किया कि इस दावे को लेकर उसके कुछ सदस्यों की राय अलग थी। रिपोर्ट ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, सुरक्षा और जवाबदेही को मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित किया है।







