Political battle intensifies over Katra ropeway project, BJP retaliates against CM Omar Abdullah's allegations

जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर विधानसभा में श्री माता वैष्णो देवी आधार शिविर कटरा में प्रस्तावित रोपवे परियोजना को लेकर सियासत गरमा गई है। सोमवार को शुरू हुआ विवाद अब और तीखा हो गया है। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट कहा कि रोपवे परियोजना को उनकी कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि जांच में सामने आया है कि सितंबर 2024 में इस परियोजना को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्वीकृति दी थी।

मुख्यमंत्री के इस बयान पर भाजपा विधायकों ने कड़ा विरोध जताया। भाजपा की ओर से दावा किया गया कि संबंधित दस्तावेज में कैबिनेट मंजूरी का उल्लेख है। एक विधायक ने दस्तावेज स्पीकर को भी सौंपा, जिसके बाद सदन में हंगामा बढ़ गया।

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उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा कि यह मुद्दा केवल एक परियोजना का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और कटरा के स्थानीय लोगों की आजीविका से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जनता को गुमराह कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने स्थानीय दुकानदारों, पिट्ठू कामगारों और घोड़ा संचालकों की रोजी-रोटी पर संभावित असर का मुद्दा उठाया।

विवाद की शुरुआत बजट सत्र के दौरान हुई थी, जब बनी के विधायक ने पारंपरिक पैदल यात्रा की धार्मिक मान्यता का हवाला देते हुए रोपवे का विरोध किया। भाजपा ने परियोजना को विकास से जोड़ते हुए समर्थन दिया, जबकि सरकार ने निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि स्पीकर को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने सदन में अनुशासन बनाए रखने की अपील की। फिलहाल रोपवे परियोजना आस्था, रोजगार और राजनीति के त्रिकोण में फंसा एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है, जिस पर आगे भी सियासी घमासान जारी रहने के संकेत हैं।