नयी दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारतीय विमानन क्षेत्र पर साफ दिखाई देने लगा है। एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने अपने कर्मचारियों को जारी एक संदेश में चेतावनी दी है कि युद्ध का वास्तविक आर्थिक असर अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है और आने वाले समय में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
कैंपबेल विल्सन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्गों में बदलाव, ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और उड़ानों के संचालन में आ रही बाधाओं के कारण एयरलाइन की लागत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टिकट किराए में सीमित बढ़ोतरी ही संभव है, इसलिए बढ़ते खर्चों का सीधा असर कंपनी की वित्तीय सेहत पर पड़ रहा है।
सीईओ ने कर्मचारियों से अपील की कि अब कंपनी के भीतर फिजूल खर्चों पर तुरंत और सख्त नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में हर विभाग को लागत कम करने के उपाय तलाशने होंगे, ताकि एयर इंडिया इस संकट से मजबूती के साथ उबर सके।
पश्चिम एशिया के कई देशों के एयरस्पेस बंद होने या सीमित उपयोग के कारण भारतीय एयरलाइंस को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे उड़ान समय और ईंधन की खपत दोनों बढ़ गए हैं। इसका सीधा असर परिचालन लागत और उड़ानों की समय-सारिणी पर पड़ा है, जिसके चलते कई उड़ानें रद्द भी करनी पड़ीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो भारतीय विमानन कंपनियों पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में एयर इंडिया द्वारा समय रहते खर्चों पर नियंत्रण और परिचालन रणनीति में बदलाव करना कंपनी के लिए दीर्घकालिक रूप से अहम साबित हो सकता है।







