त्योहारी मांग से चीनी महंगी, दालों के दाम भी बढ़े
Sugar prices rise due to festive demand; prices of pulses also go up.

नयी दिल्ली: घरेलू थोक जिंस बाजार में त्योहारी मांग का असर दिखाई देने लगा है। चीनी और कई प्रमुख दालों की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, जबकि चावल के भाव में गिरावट जारी रही। गेहूं और आटे की कीमतों में खास बदलाव नहीं हुआ। खाद्य तेलों के बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिला, जहां कुछ तेल महंगे हुए तो कुछ के दाम नीचे आ गए।

थोक बाजार में चीनी की औसत कीमत 51 रुपये प्रति क्विंटल बढ़कर 5,151 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई। त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य मीठे खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने से चीनी की कीमतों में तेजी आने लगी है। हालांकि, गुड़ की कीमत में तीन रुपये प्रति क्विंटल की मामूली गिरावट दर्ज की गई। खुदरा बाजार में भी चीनी के भाव में हल्की बढ़त देखने को मिली।

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चावल की कीमतों में गिरावट जारी

अनाज बाजार में चावल की कीमतों में नरमी बनी रही। इसकी औसत थोक कीमत 27 रुपये प्रति क्विंटल घटकर 4,124 रुपये प्रति क्विंटल रह गई। इससे पहले भी चावल के भाव में गिरावट दर्ज की गई थी। दूसरी ओर, गेहूं की कीमत 2,886 रुपये प्रति क्विंटल पर लगभग स्थिर रही। आटे का औसत भाव भी 3,364 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बना रहा। इससे संकेत मिलता है कि प्रमुख अनाजों के बाजार में फिलहाल सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

सभी प्रमुख दालों के भाव में तेजी

दालों के बाजार में सप्ताह के दौरान व्यापक तेजी दर्ज की गई। तुअर दाल की औसत कीमत 191 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ी, जबकि चना दाल 102 रुपये प्रति क्विंटल महंगी हुई। मूंग दाल के भाव में 43 रुपये और उड़द दाल में 42 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई। मसूर दाल की कीमत भी 13 रुपये प्रति क्विंटल चढ़ गई। दालों की कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर पड़ सकता है।

खाद्य तेलों में मिला-जुला रुख

खाद्य तेलों के बाजार में अलग-अलग उत्पादों की कीमतों में विपरीत रुझान रहा। मूंगफली तेल 72 रुपये प्रति क्विंटल और वनस्पति 22 रुपये प्रति क्विंटल महंगा हुआ। इसके विपरीत, सूरजमुखी तेल की कीमत 160 रुपये प्रति क्विंटल घट गई। पाम ऑयल आठ रुपये और सोया तेल दो रुपये प्रति क्विंटल सस्ता हुआ। सरसों तेल की कीमत में कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं हुआ।

कुल मिलाकर, त्योहारी मांग के बीच चीनी और दालों की कीमतों में तेजी ने घरेलू खाद्य बाजार में महंगाई का दबाव बढ़ाया है, जबकि चावल और कुछ खाद्य तेलों में गिरावट से उपभोक्ताओं को आंशिक राहत मिली है।