100 साल के होने जा रहे वकील पी. बालासुब्रमण्यन मेनन को मिला सीनियर एडवोकेट का दर्जा
Lawyer P. Balasubramanian Menon, set to turn 100, granted Senior Advocate status.

कोच्चि: केरल उच्च न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता पी. बालासुब्रमण्यन मेनन को ‘सीनियर एडवोकेट’ का दर्जा प्रदान किया है। करीब सात दशकों से अधिक समय तक कानूनी पेशे में सक्रिय रहे मेनन के नाम एक कार्यरत वकील के रूप में सबसे लंबे करियर का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है। वह अपनी जिंदगी के 100 वर्ष पूरे करने जा रहे हैं। उच्च न्यायालय का यह फैसला उनके लंबे अनुभव, कानूनी सेवाओं और न्यायिक क्षेत्र में योगदान को सम्मान देने के रूप में देखा जा रहा है।

यह निर्णय मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन की पहल पर लिया गया। कानूनी क्षेत्र से जुड़े जानकारों के मुताबिक, यह एक दुर्लभ उदाहरण है, जब किसी ऐसे अधिवक्ता को सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिया गया है, जिनका अधिकांश पेशेवर जीवन जिला स्तर की निचली अदालतों में मुकदमों की पैरवी करते हुए बीता है।

GNSU Admission Open 2026

73 साल से अधिक का कानूनी अनुभव

पी. बालासुब्रमण्यन मेनन ने वर्ष 1950 में वकालत के लिए नामांकन कराने के बाद कानूनी पेशे में अपना सफर शुरू किया था। लंबे समय तक लगातार प्रैक्टिस करने के कारण उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई। वर्ष 2023 में उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ, जब एक कार्यरत वकील के रूप में उनका करियर 73 साल और 60 दिन का हो गया था। उनका यह रिकॉर्ड कानूनी पेशे के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मेनन की कानूनी यात्रा मद्रास उच्च न्यायालय से शुरू हुई थी। वहां उन्होंने तत्कालीन महाधिवक्ता कुट्टीकृष्णन मेनन के मार्गदर्शन में करीब दो साल तक काम किया। इसके बाद वह अपने गृह क्षेत्र पलक्कड़ लौट आए और आपराधिक मामलों के अनुभवी अधिवक्ता के.एस. रामकृष्ण अय्यर के मार्गदर्शन में वकालत जारी रखी।

आपराधिक मामलों से दीवानी कानून तक का सफर

अपने करियर के शुरुआती दौर में मेनन ने मुख्य रूप से आपराधिक मामलों पर ध्यान केंद्रित किया। हालांकि, कोच्चि में एक मुकदमे के दौरान न्यायाधीश के साथ हुई एक घटना उनके पेशेवर जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इसके बाद उन्होंने दीवानी कानून से जुड़े मामलों पर अधिक ध्यान देना शुरू किया। आगे चलकर दीवानी मुकदमेबाजी उनके करियर का प्रमुख हिस्सा बन गई।

सीनियर एडवोकेट का दर्जा मिलने से मेनन के लंबे कानूनी सफर को विशेष मान्यता मिली है। उनका करियर भारतीय न्याय व्यवस्था में आए बदलावों का साक्षी रहा है। उनका अनुभव और जिला अदालतों में लंबे समय तक सक्रिय रहना कानूनी पेशे में निरंतरता, समर्पण और व्यावहारिक अनुभव के महत्व को रेखांकित करता है।