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महिला आरक्षण पर सरकार को झटका, अब क्या होगी नरेंद्र मोदी सरकार की अगली रणनीति?

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महिला आरक्षण पर सरकार को झटका, अब क्या होगी नरेंद्र मोदी सरकार की अगली रणनीति?

महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) बिल 2026 को लोकसभा में पास नहीं हो पाने से नरेंद्र मोदी सरकार को बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को पेश इस अहम बिल को पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने विरोध किया। कुल 528 सदस्यों ने मतदान किया, लेकिन पास होने के लिए 352 वोट जरूरी थे। इस तरह बिल 54 वोट से पीछे रह गया।यह 2014 के बाद पहली बार है जब केंद्र सरकार का कोई बड़ा विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो पाया। इस बिल का उद्देश्य 2023 के महिला आरक्षण कानून, यानी ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को जल्द लागू करना था। प्रस्ताव में लोकसभा सीटों की संख्या 550 से बढ़ाकर 850 करने और जनगणना का इंतजार किए बिना आरक्षण लागू करने की बात कही गई थी। बिल के साथ पेश किए गए दो अन्य प्रस्ताव—डिलिमिटेशन बिल 2026 और यूनियन टेरिटरीज लॉ (संशोधन) बिल 2026—को भी सरकार ने वापस ले लिया।

डिलिमिटेशन बिल में 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण करने का प्रावधान था, जिस पर क्षेत्रीय असमानता को लेकर विवाद सामने आया। संसद में चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष से समर्थन की अपील की। अमित शाह ने अंतिम समय में संशोधित प्रस्ताव लाने की भी बात कही, लेकिन विपक्ष ने इसे स्वीकार नहीं किया।अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती महिला आरक्षण को लागू करने की है। मौजूदा कानून के तहत इसे लागू करने के लिए नई जनगणना और डिलिमिटेशन जरूरी है, जिससे यह प्रक्रिया 2034 तक खिंच सकती है। ऐसे में सरकार नए विकल्पों के साथ फिर से संसद में प्रस्ताव ला सकती है। शनिवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में आगे की रणनीति पर फैसला लिया जा सकता है।

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