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पेपर लीक कानून ऐतिहासिक कदम, लोकतंत्र को भीड़तंत्र में नहीं बदलना चाहिए: शांता कुमार

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Paper leak law a historic step, democracy should not be converted into mobocracy: Shanta Kumar

पालमपुर: हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने पेपर लीक रोकने वाले कड़े कानून की संसद में मंज़ूरी का स्वागत किया है। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया है जो परीक्षा के पेपर लीक होने की समस्या पर प्रभावी तरीके से रोक लगाएगा। बुधवार को यहां जारी एक बयान में श्री कुमार ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पेपर लीक और भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबे संघर्ष के बाद दो अहम घटनाक्रम हुए हैं। पहला, लोकसभा द्वारा पेपर लीक को रोकने के लिए एक कड़ा कानून पारित किया जाना।


भाजपा नेता ने इस कानून का समर्थन करने के लिए सभी विपक्षी दलों का धन्यवाद किया और कहा कि यह कानून पेपर लीक जैसे गंभीर अपराध से सख्ती से निपटेगा और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करने में मदद करेगा।

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श्री कुमार ने कहा कि दूसरी अहम बात इस मुद्दे के लिए लंबे समय तक चलने वाले समाधान सुझाने के मकसद से छह जाने-माने राष्ट्रीय विद्वानों की एक समिति का गठन करना था। उन्होंने भरोसा व्यक्त किया कि समिति की सिफारिशें इस समस्या को पूरी तरह से हल करने में मदद करेंगी।


देश में हाल की घटनाओं का उल्लेख करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि टेलीविज़न पर हो रही घटनाओं को देखकर उन्हें अक्सर चिंता और दुख होता था। उन्होंने चेतावनी दी कि यह डर बढ़ रहा है कि भारत के लोकतंत्र को भीड़तंत्र में बदलने नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से अपील की कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करें और यह सुनिश्चित करें कि लोकतंत्र मजबूत बना रहे और भीड़तंत्र के प्रभाव से सुरक्षित रहे।