काठमांडू: भारत से सटे नेपाल के पूर्वी सीमावर्ती जिलों में दो समुदायों के बीच शुरू हुई सांप्रदायिक हिंसा तराई क्षेत्र के कई अन्य हिस्सों में भी फैल गयी है। हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर तीन हो गयी है, जिसके बाद सुरक्षा के लिहाज से भारत-नेपाल सीमा से सटे सुनसरी, सप्तरी, सिराहा और धनुषा जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया है, जबकि पर्सा जिले में निषेधाज्ञा लागू की गयी है।
स्थिति पर काबू पाने के लिए नेपाल पुलिस और सशस्त्र प्रहरी बल के साथ-साथ नेपाली सेना की बड़ी टुकड़ियों को मैदान में उतारा गया है। उपद्रव की शुरुआत नेपाल के सुनसरी जिले में रविवार रात दो समुदायों के बीच हुई झड़प से हुई थी, जिसमें एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी।
इसके बाद उपजी अशांति में गंभीर रूप से घायल एक अन्य युवक ने गुरुवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं, गुरुवार को ही सिराहा जिले के गोलबाजार में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई ताजा झड़प में गोली लगने से एक और 17 वर्षीय किशोर की मौत हो गयी।
प्रदर्शनकारियों ने गुरुवार सुबह भारत-नेपाल संपर्क के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले ‘पूर्व-पश्चिम राजमार्ग’ को अवरुद्ध कर दिया। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन गोलबाजार तक फैल गया, जहां उपद्रवियों ने कई दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ के बाद आग लगा दी।
इस दौरान घरेलू हथियारों से लैस उपद्रवियों के समूहों के सड़कों पर उतरने से तनाव काफी बढ़ गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को लाठीचार्ज और 21 राउंड आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
सिराहा जिले के पुलिस प्रवक्ता ने स्थिति को तनावपूर्ण बताते हुए कहा कि फिलहाल पहली प्राथमिकता शांति और कानून-व्यवस्था बहाल करना है। हिंसा के दौरान चली गोलियों के स्रोत की जांच की जा रही है।







