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महाराष्ट्र में बड़ा आदेश: विट्ठल मूर्ति की सुरक्षा पर कोर्ट सख्त, केमिकल लेप बैन

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Major order in Maharashtra: Court strict on security of Vitthal idol; chemical coating banned.

ठाणे/पंढरपुर: महाराष्ट्र के सोलापुर जिले की एक अदालत ने पंढरपुर स्थित प्रसिद्ध विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर में भगवान विट्ठल की मूर्ति पर प्रस्तावित रासायनिक सुरक्षा परत (केमिकल कोटिंग) लगाने पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट कहा कि धार्मिक परंपराओं, आस्था और श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करना अत्यंत आवश्यक है।

संयुक्त सिविल जज एसएस राउल ने यह आदेश महाराष्ट्र मंदिर महासंघ और वारकरी समुदाय के सदस्यों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ताओं ने मंदिर समिति के उस निर्णय को चुनौती दी थी, जिसमें मूर्ति पर एपॉक्सी रेजिन जैसे आधुनिक रसायनों से लेप करने की योजना बनाई गई थी। उनका कहना था कि इस प्रकार के रसायन शास्त्रों के विरुद्ध हैं और इससे प्राचीन मूर्ति की पवित्रता प्रभावित होती है। उन्होंने पारंपरिक प्राकृतिक ‘वज्रलेप’ विधि को अपनाने की मांग की।

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वहीं, मंदिर समिति ने अदालत में दलील दी कि आगामी आषाढ़ी एकादशी यात्रा से पहले मूर्ति के संरक्षण के लिए यह कदम जरूरी है और यह पुरातत्व विभाग की सिफारिश पर आधारित है। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि मंदिर समिति केवल एक संरक्षक है, उसे मूर्ति पर स्वामित्व का अधिकार नहीं है। मूर्ति सभी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए उससे जुड़े किसी भी निर्णय में उनकी भावनाओं का ध्यान रखना अनिवार्य है।

अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि फिलहाल मूर्ति सुरक्षित स्थिति में है और बिना स्पष्ट वैज्ञानिक आधार के किसी भी रासायनिक परत की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि पारंपरिक नियमों से हटकर किया गया कोई भी कार्य मूर्ति के सम्मान के विपरीत होगा।

मामले की अंतिम सुनवाई तक मंदिर समिति को केमिकल कोटिंग की प्रक्रिया पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया है। इस फैसले के बाद वारकरी समुदाय में संतोष का माहौल है। हर साल लाखों श्रद्धालु आषाढ़ी एकादशी पर पंढरपुर पहुंचकर भगवान विट्ठल के दर्शन करते हैं, जिससे यह मुद्दा धार्मिक आस्था और आधुनिक संरक्षण के बीच संतुलन का प्रतीक बन गया है।