नयी दिल्ली: दिल्ली आबकारी नीति मामले में कानूनी और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, जहां आम आदमी पार्टी के प्रमुख Arvind Kejriwal ने खुद अदालत में अपनी पैरवी करने का फैसला किया है। यह मामला अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है, क्योंकि केजरीवाल व्यक्तिगत रूप से दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी दलीलें पेश करने वाले हैं, जिससे इस केस की गंभीरता और बढ़ गई है।
इस बीच, केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia ने सुनवाई कर रही जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच पर सवाल उठाए हैं। दोनों नेताओं ने अदालत से अनुरोध किया है कि न्यायहित में इस मामले को किसी अन्य बेंच को स्थानांतरित किया जाए। उनकी कानूनी टीम का कहना है कि निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए यह कदम जरूरी है।
मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की याचिकाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ED ने निचली अदालत द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों को हटाने की मांग की है, जिन्हें उसने जांच एजेंसियों के खिलाफ और बिना उचित सुनवाई के बताया है। एजेंसी का तर्क है कि इन टिप्पणियों से उसकी साख को नुकसान पहुंचा है और यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 22 अप्रैल 2026 तक का समय दिया है और चेतावनी दी है कि समय पर जवाब न देने पर उनके अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले विशेष CBI-ED कोर्ट ने सबूतों के अभाव में केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। हालांकि, CBI ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। अब सभी की नजरें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस हाई-प्रोफाइल मामले की दिशा तय हो सकती है।







