
नयी दिल्ली: Lenskart ने बिंदी-तिलक विवाद के बाद अपनी छवि स्पष्ट करते हुए स्टोर कर्मचारियों के लिए नई और पारदर्शी इन-स्टोर स्टाइल गाइड जारी की है। कंपनी ने साफ कहा है कि कर्मचारियों को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ काम करने की पूरी आजादी है। नई गाइडलाइन में बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब और पगड़ी जैसे प्रतीकों को खुलकर स्वीकार किया गया है।
कंपनी ने 18 अप्रैल को जारी बयान में कहा कि उसने ग्राहकों और समुदाय की प्रतिक्रियाओं को गंभीरता से सुना है और उसी के आधार पर यह कदम उठाया गया है। लेंसकार्ट के मुताबिक, ये प्रतीक किसी अपवाद के तौर पर नहीं, बल्कि कंपनी की कार्यसंस्कृति और पहचान का हिस्सा हैं। कंपनी ने इस बात पर जोर दिया कि उसके 2400 से अधिक स्टोर्स में काम करने वाले कर्मचारी अपनी आस्था और परंपरा के साथ रोज काम पर आते हैं, और उनसे इसे छोड़ने के लिए कभी नहीं कहा जाएगा।
कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि एक पुराने आंतरिक दस्तावेज के कारण कुछ कर्मचारियों को यह महसूस हुआ कि उनकी धार्मिक पहचान का सम्मान नहीं किया जा रहा। इसके लिए कंपनी ने खेद जताते हुए कहा कि यह उसकी मूल सोच और मूल्यों का प्रतिनिधित्व नहीं करता।
इस विवाद पर Peyush Bansal ने भी सफाई दी। उन्होंने बताया कि वायरल दस्तावेज एक पुराना ट्रेनिंग मैटेरियल था, न कि आधिकारिक एचआर नीति। 17 फरवरी 2026 को जानकारी मिलते ही इसे हटा दिया गया था। उन्होंने इस चूक की जिम्मेदारी लेते हुए भरोसा दिलाया कि भविष्य में सभी आंतरिक दस्तावेजों की सख्त समीक्षा की जाएगी।
कंपनी ने दोहराया कि वह हमेशा सम्मानजनक धार्मिक अभिव्यक्ति का समर्थन करती है और आगे भी अपने कर्मचारियों को गर्व के साथ अपनी पहचान व्यक्त करने की स्वतंत्रता देती रहेगी।






