
नयी दिल्ली: केंद्र और केरल सरकार के बीच जारी ‘फंड की जंग’ में एक नया मोड़ आ गया है। सोमवार को लोकसभा में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ-साफ कहा कि केरल को मिलने वाले 311.95 करोड़ रुपए के आपदा कोष पर रोक नहीं लगाई गई है। उन्होंने कहा कि केरल की ओर से मदद के लिए अभी तक अर्जी ही नहीं डाली गई है। संसद में विपक्षी सांसदों ने केरल के बकाये को लेकर सवाल उठाए थे।
इसी पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने महत्वपूर्ण तकनीकी अंतर समझाया। उन्होंने कहा, “केंद्र की ओर से किसी अनुदान को मंजूरी देना एक बात है और उस राशि के लिए दावा पेश करना दूसरी बात।” सीतारमण के मुताबिक, 311.95 करोड़ रुपए की यह राशि केंद्र सरकार के पास उपलब्ध है। लेकिन, केरल सरकार ने इसे पाने के लिए आवेदन नहीं दिया है। अक्सर केंद्र-राज्य के बीच विवाद की जड़ ‘यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट’ यानी उपयोगिता प्रमाण पत्र बनता है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारी नियम के मुताबिक, पिछली दी गई राशि कहां और कैसे खर्च हुई, इसका हिसाब दिए बिना अगली किस्त जारी नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा कि जब तक राज्य पिछली परियोजनाओं का हिसाब नहीं देते, तब तक फंड जारी करना संभव नहीं होता। केरल लगातार केंद्र पर ‘आर्थिक नाकेबंदी’ का आरोप लगाता रहा है। ऐसे में वित्त मंत्री का यह बयान राज्य के दावों पर सवालिया निशान लगाता है। यह मामला आपदा प्रबंधन से जुड़ा है। आपदा शमन कोष का इस्तेमाल बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के किया जाना था। हालांकि, अब यह अधर में लटकी नजर आ रही हैं। गेंद अब केरल सरकार के पाले में है। यदि राज्य इन फंडों को हासिल करना चाहता है, तो उसे पाई-पाई का हिसाब देना होगा।






