चंडीगढ़। पंजाब के पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर ब्लैक मनी एक्ट, 2015 के तहत कर मांग और वास्तविक वसूली के बीच बड़े अंतर को कम करने के लिए कई उपाय सुझाए हैं। उन्होंने कहा कि विदेशों में भारतीय नागरिकों की अघोषित संपत्तियों से जुड़ी जानकारी मिलने के बावजूद उसे प्रभावी कार्रवाई और वास्तविक राजस्व वसूली में बदलना बड़ी चुनौती है।
सिद्धू ने संसद में सरकार की ओर से दिए गए जवाबों का हवाला देते हुए कहा कि जुलाई 2015 से मार्च 2025 के बीच ब्लैक मनी एक्ट के तहत करीब 35,104 करोड़ रुपये की कर मांग की गई, जबकि इस अवधि में लगभग 338 करोड़ रुपये की ही वास्तविक वसूली हो सकी। उन्होंने इस अंतर को कम करने के लिए संस्थागत स्तर पर बेहतर समन्वय और कार्रवाई की जरूरत बताई।
उन्होंने राजस्व विभाग के मौजूदा अधिकारों के तहत केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (एफआईयू-इंड) की संयुक्त विदेशी संपत्ति वसूली इकाई गठित करने का सुझाव दिया। उनके अनुसार, इससे विदेशों में मौजूद अघोषित संपत्तियों से संबंधित सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई और वसूली की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
सिद्धू ने संसद में हर वर्ष विदेशों से की गई वास्तविक कर वसूली और भारत वापस लाई गई संपत्तियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने का भी सुझाव दिया। उनका कहना है कि इससे इस दिशा में सरकार की कार्रवाई और उसके परिणामों की नियमित समीक्षा संभव होगी।
इसके अलावा उन्होंने कुछ चुनिंदा देशों के साथ विदेशों में भारतीय कर देनदारी की वसूली के लिए पायलट परियोजना शुरू करने का प्रस्ताव रखा। उनके अनुसार, इस तरह की पहल से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कर वसूली की प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से परखा जा सकता है।
सिद्धू ने कहा कि उनके सुझाए गए उपायों के लिए किसी नए कानून की आवश्यकता नहीं होगी। उनका मुख्य उद्देश्य विदेशों में अघोषित संपत्ति रखने वाले करदाताओं से संबंधित उपलब्ध सूचनाओं को प्रभावी जांच, कार्रवाई और राजस्व वसूली में बदलना है।







