कन्हैया लाल हत्याकांड: पांच आरोपियों को जमानत नहीं
Kanhaiya Lal Murder Case: No Bail for Five Accused

जयपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय ने उदयपुर के चर्चित कन्हैया लाल हत्याकांड से जुड़े मामले में पांच आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने निचली विशेष अदालत के उन आदेशों को बरकरार रखा, जिनमें आरोपियों को जमानत देने से इनकार किया गया था।

मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन की पीठ ने वसीम अली, मुस्लिम खान, मोहसिन खान, मोहम्मद मोहसिन और आसिफ हुसैन की ओर से दायर अलग-अलग जमानत याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने उपलब्ध अभियोजन सामग्री और मामले में लागू कानूनी प्रावधानों पर विचार करने के बाद आरोपियों को राहत देने से इनकार किया।

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अदालत के अनुसार, मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की धारा 43डी(5) के तहत जमानत पर विशेष वैधानिक प्रतिबंध लागू होता है। पीठ ने कहा कि जमानत पर विचार करते समय इस प्रावधान के तहत उपलब्ध अभियोजन सामग्री का आकलन करना आवश्यक है।

उच्च न्यायालय ने यह भी ध्यान में रखा कि मामले की सुनवाई आगे बढ़ रही है। अदालत ने कहा कि केवल लंबे समय से जेल में रहने के आधार पर संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जमानत का आधार नहीं बनता, खासकर तब जब मुकदमे की कार्यवाही सक्रिय रूप से जारी हो। इसी आधार पर पांचों आरोपियों की याचिकाएं खारिज कर दी गईं।

पीठ ने अपने आदेश में आतंकवाद, कानून के शासन और राज्य की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं का भी उल्लेख किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यूएपीए जैसे विशेष कानून के तहत जमानत पर फैसला करते समय संबंधित वैधानिक शर्तों और मामले में उपलब्ध सामग्री को ध्यान में रखना होता है।

उल्लेखनीय है कि उदयपुर में दर्जी कन्हैया लाल की हत्या का मामला सामने आने के बाद इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपी गई थी। पांचों आरोपियों ने जयपुर स्थित एनआईए मामलों की विशेष अदालत द्वारा जमानत से इनकार किए जाने के फैसलों को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद फिलहाल उन्हें जमानत नहीं मिली है। न्यायालय ने मामले के गुण-दोष पर अंतिम निष्कर्ष दिए बिना जमानत याचिकाओं पर निर्णय किया है।