नयी दिल्ली। भारत और जर्मनी के बीच आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जर्मनी की राजधानी बर्लिन स्थित स्वतंत्र संस्थान काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (DGAP) में ‘इंडिया सेंटर’ की शुरुआत की गई है। इस केंद्र का उद्देश्य भारत से जुड़े विषयों पर अध्ययन, शोध और संवाद को बढ़ावा देना तथा दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर तलाशना है।
इंडिया सेंटर के उद्घाटन समारोह में भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और जर्मनी की आर्थिक मामलों एवं ऊर्जा मंत्री कैथरीना रीचे शामिल हुईं। पीयूष गोयल इन दिनों जर्मनी और नीदरलैंड की आधिकारिक यात्रा पर हैं।
इस अवसर पर गोयल ने कहा कि DGAP में इंडिया सेंटर की स्थापना भारत और जर्मनी के बढ़ते संबंधों को और गहरा करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने दोनों देशों की एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके माध्यम से महत्वाकांक्षी आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए मजबूत आधार तैयार किया जा सकता है।
वाणिज्य मंत्री ने भारत और जर्मनी के उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के उद्योग मिलकर मजबूत वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे विनिर्माण, उत्पादन और व्यापार के क्षेत्र में नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
गोयल ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे आर्थिक साझेदारी को नई गति मिल सकती है। उन्होंने दोनों देशों के कारोबारियों और निवेशकों से आपसी सहयोग के नए रास्ते तलाशने तथा साझा समृद्धि और विकास को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
DGAP की स्थापना वर्ष 1955 में बॉन में हुई थी। वर्तमान में इसका मुख्यालय बर्लिन में है। यह एक स्वतंत्र, गैर-पक्षपातपूर्ण और गैर-लाभकारी संस्थान है, जो विदेश नीति, सुरक्षा, लोकतंत्र, शांति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर शोध एवं चर्चा को बढ़ावा देता है।
संस्थान नीति निर्माताओं, विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और मीडिया प्रतिनिधियों के बीच संवाद का मंच उपलब्ध कराता है। इंडिया सेंटर की शुरुआत से भारत-जर्मनी संबंधों, आर्थिक साझेदारी और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श को नया मंच मिलने की उम्मीद है।







