बेमेतरा: तकनीक और डिजिटल शिक्षा के बढ़ते प्रभाव के बीच छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के ग्राम सलधा स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम शिवगंगा आश्रम आज भी वैदिक शिक्षा और गुरुकुल परंपरा को जीवंत बनाए हुए है। यहां प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए छात्र घर-परिवार से दूर रहकर वेद, उपनिषद, संस्कृत और शास्त्रों का अध्ययन कर भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपरा का संरक्षण कर रहे हैं।
आश्रम में विद्यार्थियों की दिनचर्या ब्रह्म मुहूर्त में सुबह चार बजे शुरू होती है। स्नान और पूजा-अर्चना के बाद छात्र वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए नियमित अध्ययन में जुट जाते हैं। गुरुकुल पद्धति के अनुरूप यहां शिक्षा के साथ अनुशासन, योग, गुरु सेवा, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कारों का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। आश्रम के गुरुजनों के अनुसार विद्यार्थियों को वैदिक साहित्य के साथ धार्मिक ग्रंथों और नैतिक शिक्षा का भी ज्ञान दिया जाता है, जिससे उनका सर्वांगीण विकास हो सके। उनका कहना है कि आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कारों का संरक्षण भी आवश्यक है और इसी उद्देश्य से गुरुकुल परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है।
आश्रम में अध्ययनरत अधिकांश छात्र आधुनिक तकनीक, मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर सादा जीवन एवं उच्च विचार की परंपरा का पालन कर रहे हैं। कई अभिभावक भी अपने बच्चों को भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और वैदिक ज्ञान से जोड़ने के उद्देश्य से यहां भेज रहे हैं।
डिजिटल युग में गुरुकुल परंपरा का यह स्वरूप लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सपाद लक्षेश्वर धाम शिवगंगा आश्रम भारतीय संस्कृति, वैदिक ज्ञान और संस्कार आधारित शिक्षा के संरक्षण का सशक्त माध्यम बनकर नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रहा है।







