Ghaziabad train accident victim dies; ambulance driver accused of refusing to take him to Delhi

एंबुलेंस चालक पर लापरवाही का आरोप

आरोप है कि डॉक्टरों ने जिस एंबुलेंस से अक्षय को अस्पताल लाया गया था, उसी के चालक से उन्हें दिल्ली ले जाने के लिए कहा। चालक ने कथित तौर पर एंबुलेंस में खून लगा होने की बात कहते हुए मरीज को ले जाने से इनकार कर दिया।

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इसके बाद दूसरी एंबुलेंस की व्यवस्था की गई, लेकिन तब तक काफी समय बीत चुका था। अक्षय की मौत के बाद एंबुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

जांच के बाद दोषी पर होगी कार्रवाई

108 और 102 एंबुलेंस सेवा के जिला प्रभारी मोहित कुमार ने कहा कि इमरजेंसी की स्थिति में मरीज को ले जाने से इनकार करना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने मामले की जांच कर दोषी पाए जाने पर चालक के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।

वहीं, एंबुलेंस सेवा के नोडल अधिकारी एवं जिला मलेरिया अधिकारी ज्ञानेंद्र मिश्रा ने जिला प्रभारी से दो दिन के भीतर जांच रिपोर्ट मांगी है। उनका कहना है कि आरोप सही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बिहार के औरंगाबाद के रहने वाले थे अक्षय

अक्षय के बहनोई पंकज के मुताबिक, वह मूल रूप से औरंगाबाद, बिहार के रहने वाले थे। वह कुछ दिन पहले अकेले वृंदावन घूमने आए थे और मंगलवार को नोएडा में अपने बहनोई के यहां रुके थे। बुधवार को ट्रेन से बिहार लौटते समय चंद्रनगर हॉल्ट के पास यह हादसा हो गया।

फिलहाल अक्षय ट्रेन से कैसे गिरे, इसकी वजह स्पष्ट नहीं है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

गाजियाबाद: ट्रेन हादसे में गंभीर रूप से घायल 23 वर्षीय अक्षय की इलाज के दौरान मौत हो गई। हादसे में उनके दोनों पैर घुटने के नीचे से कट गए थे और वह काफी रक्तस्राव से जूझ रहे थे। डॉक्टरों ने हालत गंभीर होने पर उन्हें दिल्ली रेफर किया, लेकिन आरोप है कि मरीज को अस्पताल लेकर पहुंची 108 एंबुलेंस के चालक ने वाहन में खून लगे होने का हवाला देकर उन्हें दिल्ली ले जाने से इनकार कर दिया।

मामला एमएमजी अस्पताल की इमरजेंसी का है। डॉक्टरों के अनुसार, दूसरी एंबुलेंस की व्यवस्था होने तक करीब 25 मिनट बीत गए। इसी दौरान सुबह करीब 10:15 बजे अक्षय ने दम तोड़ दिया।

चंद्रनगर हॉल्ट के पास ट्रेन से गिरे थे अक्षय

एमएमजी अस्पताल के ईएमओ डॉ. बृजेश कुमार ने बताया कि अक्षय बुधवार को चंद्रनगर हॉल्ट के पास ट्रेन से गिरकर गंभीर रूप से घायल हुए थे। स्थानीय लोगों की सूचना पर 108 एंबुलेंस उन्हें सुबह करीब 9:40 बजे अस्पताल लेकर पहुंची।

अस्पताल में डॉक्टरों ने तत्काल इलाज शुरू किया, लेकिन लगातार रक्तस्राव के कारण उनकी हालत बिगड़ती गई। करीब 10 मिनट बाद डॉक्टरों ने बेहतर उपचार के लिए उन्हें दिल्ली रेफर कर दिया।

एंबुलेंस चालक पर लापरवाही का आरोप

आरोप है कि डॉक्टरों ने जिस एंबुलेंस से अक्षय को अस्पताल लाया गया था, उसी के चालक से उन्हें दिल्ली ले जाने के लिए कहा। चालक ने कथित तौर पर एंबुलेंस में खून लगा होने की बात कहते हुए मरीज को ले जाने से इनकार कर दिया।

इसके बाद दूसरी एंबुलेंस की व्यवस्था की गई, लेकिन तब तक काफी समय बीत चुका था। अक्षय की मौत के बाद एंबुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

जांच के बाद दोषी पर होगी कार्रवाई

108 और 102 एंबुलेंस सेवा के जिला प्रभारी मोहित कुमार ने कहा कि इमरजेंसी की स्थिति में मरीज को ले जाने से इनकार करना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने मामले की जांच कर दोषी पाए जाने पर चालक के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।

वहीं, एंबुलेंस सेवा के नोडल अधिकारी एवं जिला मलेरिया अधिकारी ज्ञानेंद्र मिश्रा ने जिला प्रभारी से दो दिन के भीतर जांच रिपोर्ट मांगी है। उनका कहना है कि आरोप सही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बिहार के औरंगाबाद के रहने वाले थे अक्षय

अक्षय के बहनोई पंकज के मुताबिक, वह मूल रूप से औरंगाबाद, बिहार के रहने वाले थे। वह कुछ दिन पहले अकेले वृंदावन घूमने आए थे और मंगलवार को नोएडा में अपने बहनोई के यहां रुके थे। बुधवार को ट्रेन से बिहार लौटते समय चंद्रनगर हॉल्ट के पास यह हादसा हो गया।

फिलहाल अक्षय ट्रेन से कैसे गिरे, इसकी वजह स्पष्ट नहीं है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।