तिरुवनंतपुरम: केरल में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने राज्यव्यापी अभियान ‘ऑपरेशन थेलिम 2.0’ के तहत बड़ी कार्रवाई की है। निरीक्षण के दौरान नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 32 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए। इसके अलावा, मानकों पर खरा नहीं उतरने वाले 568 लीटर इस्तेमाल किए गए खाद्य तेल और अस्वच्छ परिस्थितियों में तैयार किए गए 7,000 तले हुए खाद्य पदार्थों को नष्ट कर दिया गया।
स्वास्थ्य और देवस्वोम मंत्री के. मुरलीधरन ने बताया कि अभियान के तहत राज्यभर में 160 स्नैक निर्माण इकाइयों की जांच की गई। इस कार्य के लिए 56 निरीक्षण दल तैनात किए गए थे। इन दलों ने तड़के तीन बजे से ही जांच शुरू कर दी, ताकि खाद्य पदार्थों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले तेल की गुणवत्ता और स्वच्छता संबंधी मानकों का जायजा लिया जा सके।
खराब तेल और अस्वच्छ खाद्य पदार्थ नष्ट
निरीक्षण के दौरान विशेष उपकरणों की मदद से इस्तेमाल किए गए खाना पकाने के तेल की गुणवत्ता की मौके पर जांच की गई। जांच में मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए 568 लीटर तेल को नष्ट कर दिया गया। इसके साथ ही, अस्वच्छ परिस्थितियों में तैयार किए गए और वितरण के लिए रखे गए 7,000 तले हुए स्नैक्स भी नष्ट किए गए।
मंत्री के अनुसार, विभाग ने 23 प्रतिष्ठानों को कमियां दूर करने के लिए नोटिस जारी किए हैं। छह मामलों में आगे कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई है, जबकि 80 प्रतिष्ठानों के खिलाफ जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है।
तेल के बार-बार इस्तेमाल पर चेतावनी
खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि खाना पकाने वाले तेल को बार-बार गर्म करने और लंबे समय तक इस्तेमाल करने से उसमें हानिकारक रासायनिक यौगिक बढ़ सकते हैं। तेल में टोटल पोलर कंपाउंड्स (टीपीसी) की मात्रा 25 प्रतिशत से अधिक होने पर उसका दोबारा खाना पकाने में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
विभाग ने खाद्य कारोबारियों को नियमित रूप से तेल की गुणवत्ता जांचने और खराब तेल का नियमानुसार निपटान करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने कहा कि खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और असुरक्षित तेल के दोबारा इस्तेमाल के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।







