अभिजीत दीपके की हिरासत पर परिजनों ने उठाए सवाल
Family members raise questions regarding Abhijit Deepke's custody.

छत्रपति संभाजीनगर: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके को दिल्ली में हिरासत में लिए जाने के बाद उनके परिजनों ने केंद्र और राज्य सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का आरोप लगाया है। परिवार ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना और सरकार से सवाल पूछना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।

अभिजीत दीपके की हिरासत के बाद छत्रपति संभाजीनगर स्थित उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया है। इस घटनाक्रम से उनके परिवार में नाराजगी है। उनकी मां ने कहा कि उनका बेटा किसी निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि गरीब बच्चों और शिक्षित युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहा है।

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उन्होंने हिरासत की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि अभिजीत किसी तरह का दंगा फैलाने नहीं जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि उनके बेटे को पहले गलत तरीके से पाकिस्तानी बताया गया और अब प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया है। उन्होंने इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले युवाओं के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाती है, जबकि गंभीर अपराधों के मामलों में कार्रवाई उतनी प्रभावी नहीं दिखाई देती।

अभिजीत की मां ने घर से निकलने से पहले हुई बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्हें आशंका थी कि उनका बेटा हिरासत में लिया जा सकता है। उन्होंने उसे सावधान रहने को कहा था, लेकिन अभिजीत ने उन्हें चिंता नहीं करने का भरोसा दिलाया था। मां ने कहा कि उनकी आशंका आखिरकार सही साबित हुई।

अभिजीत के पिता ने भी हिरासत की आलोचना करते हुए संविधान का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध करने और सरकार से सवाल पूछने का मौलिक अधिकार देता है। उनके मुताबिक, प्रदर्शन की अनुमति को लेकर उठने वाले सवालों के बीच यह भी विचार किया जाना चाहिए कि नागरिक अन्याय के खिलाफ अपनी बात कैसे रख सकते हैं।

उन्होंने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं को कमजोर करने का आरोप लगाया और कहा कि इस तरह की कार्रवाई से लोगों में असंतोष बढ़ सकता है। पिता ने हिरासत को सार्वजनिक विरोध की आवाज दबाने का प्रयास बताया।

हालांकि, अभिजीत दीपके को हिरासत में लेने के कारणों और मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष इस खबर में उपलब्ध नहीं है। फिलहाल, इस कार्रवाई को लेकर उनके परिवार के आरोप और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े सवाल चर्चा में हैं।