नयी दिल्ली: लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक और प्रस्तावित परिसीमन बिल को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने इस मुद्दे पर संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है और अब इसमें कुछ और जोड़ने की जरूरत नहीं है।
संसद में इन विधेयकों के पेश होने के साथ ही जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दलों ने इन्हें असंवैधानिक बताते हुए कड़ा विरोध जताया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने स्पष्ट कहा कि विपक्ष परिसीमन बिल का एकजुट होकर विरोध करेगा और संसद को ऐसे विधेयकों के जरिए “हाईजैक” नहीं होने देगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि लोकतंत्र पर किसी भी तरह का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण का पूरी तरह समर्थन करती है, जिसे 2023 में सर्वसम्मति से पारित किया जा चुका है। लेकिन वर्तमान प्रस्ताव को उन्होंने महिला आरक्षण से अलग बताते हुए आरोप लगाया कि यह परिसीमन और “गेरीमैंडरिंग” के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि कांग्रेस ओबीसी, दलित और आदिवासी समुदायों के अधिकारों में किसी तरह की कटौती नहीं होने देगी और जातिगत जनगणना के आंकड़ों की अनदेखी का विरोध करेगी। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि दक्षिण, पूर्वोत्तर और छोटे राज्यों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले परिसीमन के बाद सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक की जा सकती है, ताकि महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। इसके साथ ही विधानसभा सीटों में भी 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।







