नयी दिल्ली, अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) से व्यापक एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि राम मंदिर से जुड़े पदाधिकारियों की नियुक्ति ट्रस्ट की बजाय भाजपा के इशारे पर हुई है और चढ़ावा चोरी का खुलासा होने के बाद इस्तीफे देना इस पूरे मामले की गंभीरता को दर्शाते हैं इसलिए पूरे प्रकरण की इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता प्रमोद तिवारी ने रविवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि अयोध्या में भूमि अधिग्रहण से लेकर मंदिर निर्माण और चढ़ावे के प्रबंधन तक लगातार कई गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट ने सात भूखंडों की खरीद की है और वे भूखंड राम मंदिर से काफी दूर हैं। इन भूखंडों का मंदिर के लिए कोई उपयोग नहीं है ऐसे में इन खरीदों का उद्देश्य स्पष्ट किया जाना चाहिए। श्री तिवारी ने कहा, “राम मंदिर में सिर्फ चढ़ावे की चोरी नहीं हुई, बल्कि शिला पूजन के समय से ही चोरी शुरू हो गई थी।” उन्होंने कहा कि वह अवध क्षेत्र के रहने वाले हैं और वर्ष 1985 से 1990 के बीच उत्तर प्रदेश सरकार में पर्यटन मंत्री रहे हैं। उनका दावा था कि उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन को शुरू से बहुत करीब से देखा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने मंदिर निर्माण से अधिक मंदिर आंदोलन का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास किया। उनका कहना यह भी कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर का उद्घाटन तब किया, जब निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ था। इसे परंपराओं के विपरीत बताते हुए उन्होंने दावा किया कि इसका राजनीतिक असर भी भाजपा पर नकारात्मक पड़ा है और उसकी लोकसभा की सीटें 306 से घटकर 240 पर आई हैं। कांग्रेस नेता ने मंदिर समिति द्वारा अनाप शनाप खर्च किए जाने का आरोप लगाया और कहा कि मंदिर उद्घाटन समारोह पर 112 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि मंदिर का निर्माण उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद हुआ। उन्होंने यह भी दावा किया कि राम मंदिर में चढ़े सोने और चांदी को पिघलाकर उससे प्राप्त धन को शेयर बाजार में निवेश किया गया। उन्होंने कहा कि इन सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है श्री तिवारी ने कहा, “मैं यह नहीं कहता कि भाजपा में सभी ‘चंदा चोर’ हैं, लेकिन यदि चढ़ावा चोरी की लिस्ट तैयार की जाए तो उसमें सारे ‘चंदा चोर’ भाजपा में हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस मामले में जवाबदेही से बचना चाहती है, लेकिन अब सचाई सामने आनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में एसआईटी से व्यापक और निष्पक्ष जांच कराई जाए।







