
जशपुर: छत्तीसगढ़ में जशपुर वनमंडल के चार वन परिक्षेत्रों में लगभग 32 हाथियों का दल सक्रिय रूप से विचरण कर रहा है। हाथियों की लगातार आवाजाही को देखते हुए वन विभाग ने प्रभावित गांवों में सतर्कता बढ़ा दी है। विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) और मैदानी अमला चौबीसों घंटे हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं तथा ग्रामीणों को समय-समय पर सूचना देकर सतर्क किया जा रहा है।
डीएफओ शशि कुमार ने रविवार को बताया कि वर्तमान में दुलदुला, पत्थलगांव, कांसाबेल और बगीचा वन परिक्षेत्र के कई गांवों के आसपास हाथियों का दल विचरण कर रहा है। दुलदुला वन परिक्षेत्र के धुरीआम्बा, करडेगा, केंदापानी, धांधआम्बा, बुकना, मधुटोली और कोहड़ा पहरी, पत्थलगांव वन परिक्षेत्र के खाडामाचा, हरदीझरिया, पीटाआमा, राजाआमा, खमरगड़ा, महेशपुर, काडरो और झिमकी, कांसाबेल वन परिक्षेत्र के चेटबा, नारायण बहली, मड़ियाझरिया और सोनाजोरी तथा बगीचा वन परिक्षेत्र के झिकी, खंताडांड़, टटकेला, परसाडांड़, पेटा, कुरडेग, बिमड़ा, सामरबार, दुर्गापारा, सुईकोना, मैनी, बुचीडांड, जुजगु और कुरडेग के आसपास हाथियों की गतिविधियां दर्ज की गई हैं।
श्री शशि कुमार ने बताया कि हाथियों की लोकेशन का नियमित रूप से पता लगाकर आसपास के गांवों में तत्काल सूचना पहुंचाई जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में लगातार मुनादी कर ग्रामीणों को हाथियों की मौजूदगी और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथियों के विचरण वाले क्षेत्रों में लकड़ी, चारा या अन्य कार्यों के लिए जंगल में अनावश्यक प्रवेश न करें। किसी भी परिस्थिति में हाथियों के पास जाने, उन्हें उकसाने, उनका पीछा करने अथवा सेल्फी और वीडियो बनाने का प्रयास न करें। विशेष रूप से रात के समय हाथियों के विचरण वाले क्षेत्रों में जाने से बचें।
डीएफओ ने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी दिखाई दे या उनकी गतिविधियों की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तत्काल निकटस्थ वन अधिकारी, वन कर्मचारी या आरआरटी को दें। अफवाहों पर विश्वास न करें और केवल वन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं का ही पालन करें।
वन विभाग का कहना है कि ग्रामीणों की सतर्कता, समय पर सूचना और विभाग के साथ सहयोग से हाथी-मानव द्वंद्व की घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।






