श्रीनगर: हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और कश्मीर के मुख्य मौलवी मीरवाइज उमर फारूक ने मंगलवार को केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर में सामाजिक और राजनीतिक संगठनों पर लगाए जा रहे कथित प्रतिबंधों की नीति पर पुनर्विचार करने की अपील की।
मीरवाइज ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि शांति और स्थिरता के लिए केंद्र को जनभावनाओं और विभिन्न संगठनों की अपीलों को सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध स्थानीय नागरिकों और संगठनों के लिए उत्पीड़न या डराने-धमकाने का माध्यम नहीं बनने चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों को जब अदालतों में चुनौती दी जाती है तो कानूनी प्रक्रिया को निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए। अधिकारियों को ऐसी एकतरफा कार्रवाई से बचना चाहिए, जिससे न्यायिक उपायों का उद्देश्य ही प्रभावित हो।
मीरवाइज ने कुर्क की गई संपत्तियों और शैक्षणिक संस्थानों के मामलों में भी संयम बरतने तथा कानून और न्यायिक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वास्तविक जनसमर्थन रखने वाली आवाजों को नजरअंदाज कर कोई टिकाऊ राजनीतिक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती।
उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव रखने वाले समूहों को राजनीतिक प्रक्रिया में स्थान देने और उनके साथ बातचीत की जरूरत पर भी जोर दिया।
मीरवाइज का यह बयान पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के बयान के एक दिन बाद आया है। महबूबा ने भी जमात-ए-इस्लामी की संपत्तियों के मामले में सरकार से उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की अपील की थी।
गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यूएपीए के तहत जमात-ए-इस्लामी पर वर्ष 2019 में पांच साल का प्रतिबंध लगाया था। फरवरी 2024 में इस प्रतिबंध को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाया गया था।








