वाशिंगटन: अमेरिका में मध्यावधि चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टियों के बीच कई राज्यों में कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। चुनाव के नतीजे अमेरिकी कांग्रेस में सत्ता का संतुलन बदल सकते हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शेष दो वर्षों की राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इस चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 33 सीटों पर मतदान हो रहा है। फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस के दोनों सदनों में अपने बहुमत को बरकरार रखने की कोशिश कर रही है, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी एक या दोनों सदनों में नियंत्रण हासिल करना चाहती है।
चुनाव पूर्व जनमत सर्वेक्षणों में कई राज्यों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की स्थिति प्रतिस्पर्धी बताई गई है। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी के पास प्रचार के लिए वित्तीय संसाधनों की बढ़त है और उसे अपने पारंपरिक समर्थक राज्यों में मजबूत समर्थन की उम्मीद है।
राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट, महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत और ईरान के साथ युद्ध को लेकर प्रशासन की नीतियां चुनाव के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। इन मुद्दों का असर रिपब्लिकन उम्मीदवारों के चुनावी अभियान पर भी देखने को मिल रहा है।
नॉर्थ कैरोलिना, ओहायो, अलास्का और टेक्सास में सीनेट की सीटों को लेकर विशेष मुकाबला है। नॉर्थ कैरोलिना में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार रॉय कूपर का सामना रिपब्लिकन माइकल व्हाटली से है। ओहायो में पूर्व सीनेटर शेरॉड ब्राउन रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन हस्टेड के खिलाफ वापसी की कोशिश कर रहे हैं।
अलास्का में मैरी पेल्टोला और रिपब्लिकन सीनेटर डैन सुलिवन के बीच मुकाबला है। यहां ईंधन की कीमतें और स्वास्थ्य सेवाओं की लागत प्रमुख चुनावी मुद्दे हैं। वहीं टेक्सास में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स तालारिको और रिपब्लिकन केन पैक्सटन आमने-सामने हैं। टेक्सास में डेमोक्रेटिक पार्टी ने पिछली बार 1988 में सीनेट चुनाव जीता था।
मिशिगन में भी सीनेट की एक महत्वपूर्ण सीट पर मुकाबला हो रहा है। यहां अब्दुल अल-सईद और माइक रोजर्स के बीच चुनावी टक्कर है।
इस बीच, न्यूयॉर्क के वेस्टचेस्टर काउंटी के कुछ मतदान केंद्रों पर मतपत्र स्कैन करने वाली मशीनों में तकनीकी खराबी की खबर सामने आई है।
चुनाव परिणामों से यह स्पष्ट होगा कि अमेरिकी कांग्रेस में किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा और राष्ट्रपति ट्रंप के विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की संभावनाएं किस तरह प्रभावित होंगी।







