ईरान के परमाणु ठिकानों के पुनर्निर्माण के संकेत नहीं: IAEA प्रमुख
No signs of reconstruction at Iran's nuclear sites: IAEA chief

संयुक्त राष्ट्र: अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा है कि एजेंसी को ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं, जिनसे पता चले कि ईरान ने अमेरिकी और इजरायली सैन्य हमलों में क्षतिग्रस्त हुए अपने परमाणु केंद्रों की मरम्मत या पुनर्निर्माण की कोशिश की है। हालांकि, एजेंसी अब तक ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार की मौजूदा स्थिति की पुष्टि नहीं कर सकी है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में ग्रॉसी ने ईरान से अपील की कि वह अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को अपने सभी परमाणु केंद्रों तक पहुंचने की अनुमति दे। इसमें वे केंद्र भी शामिल हैं, जिन्हें सैन्य हमलों में नुकसान पहुंचा था। उन्होंने कहा कि जून 2025 के बाद से एजेंसी को ऐसी कोई गतिविधि नहीं मिली है, जो क्षतिग्रस्त परमाणु ठिकानों की मरम्मत या पुनर्निर्माण की ओर इशारा करती हो।

GNSU Admission Open 2026

संवर्धित यूरेनियम के भंडार पर चिंता

IAEA के अनुसार, ईरान के पास 440.9 किलोग्राम यूरेनियम का भंडार है, जिसे 60 प्रतिशत तक संवर्धित किया गया है। परमाणु हथियारों में इस्तेमाल के लिए यूरेनियम को आमतौर पर लगभग 90 प्रतिशत तक संवर्धित किया जाता है। हालांकि, उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम का होना अपने आप में परमाणु हथियार बनाने का प्रमाण नहीं है।

एजेंसी ने कहा है कि पिछले साल हुए अमेरिकी हमलों के बाद वह इस भंडार की स्थिति की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के पीछे उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकने का उद्देश्य बताया है। वहीं, ईरान लगातार दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।

सुरक्षा परिषद में अमेरिका और ईरान आमने-सामने

परमाणु अप्रसार संबंधी दायित्वों के पालन को लेकर ईरान का मामला सुरक्षा परिषद में उठाया गया। बैठक में अमेरिका ने तेहरान से परमाणु सामग्री की निगरानी और निरीक्षण से जुड़े सवालों के जवाब देने की मांग की। अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि ईरान को अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करना चाहिए।

दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के उपराजदूत गुलामहुसैन दारजी ने अमेरिका और इजराइल के सैन्य हमलों की आलोचना की। उन्होंने इन कार्रवाइयों को ईरान के खिलाफ आक्रामक युद्ध बताया और आरोप लगाया कि सुरक्षा परिषद ने हमलों पर पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने इजराइल के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी सवाल उठाए। इजराइल ने अपने पास परमाणु हथियार होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

परमाणु अप्रसार संधि के तहत ईरान को अपनी परमाणु गतिविधियों और सामग्री की जानकारी देनी होती है तथा IAEA को सत्यापन का अवसर देना आवश्यक है। ऐसे में निरीक्षण की बहाली और संवर्धित यूरेनियम के भंडार की पुष्टि अंतरराष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बनी हुई है।