ग्लासगो (स्कॉटलैंड): राष्ट्रमंडल खेल 2026 की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय एथलीट सीमा कालीरामना ने कहा कि यह पदक ‘ मेरी जिंदगी बदलने वाला पल’ है। पदक जीतने के बाद सीमा ने कहा, “यह पदक मेरी जिंदगी बदलने वाला पल है। मुझे उम्मीद थी कि मैं 60 मीटर का मार्क पार करूंगी और पदक जीतूंगी। लेकिन आज बहुत ज्यादा ठंड थी, जिसकी वजह से शरीर को वार्म-अप करना थोड़ा मुश्किल हो रहा था। लेकिन यह मेरा पहला कॉमनवेल्थ गेम्स था। कोई बात नहीं, जो होता है अच्छे के लिए होता है। मैं बहुत खुश हूं।”
उन्होनें महिलाओं के डिस्कस थ्रो इवेंट में 58.66 मीटर के अपने सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ कांस्य पदक जीता। वह जमैका की सामंथा हॉल (61.66 मीटर) और कनाडा की जूलिया टंक्स (60.67 मीटर) के बाद तीसरे स्थान पर रहीं।
सीमा कालीरामना का पोडियम तक का सफर खेल के मैदान के बाहर की जिंदगी के साथ-साथ चला है। पीएचडी छात्रा और चार साल के बेटे रुद्र की मां होने के साथ ही सीमा ने भारत की टॉप डिस्कस थ्रोअर्स में अपनी जगह बनाने के बीच तालमेल बिठाया है। सीमा ने बताया कि रिपब्लिक ऑफ कोरिया के गुमी में 2025 एशियन चैंपियनशिप में मिले अनुभव ने उन्हें इस मुकाबले में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद की।
उन्होंने कहा, “जब मैंने 2025 में एशियन चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था, तो मुझे यह अनुभव नहीं था कि वहां चीजें कैसे होती हैं और मुकाबले के दौरान अपने शरीर को कैसे संभालना है। वह अनुभव आज काम आया और मैंने उसी के हिसाब से सब कुछ किया। मेरे दिमाग पर कोई दबाव नहीं था। मैं बस अच्छा प्रदर्शन करना चाहती थी और अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहती थी। चाहे मेडल मिले या न मिले, मुझे इस बात का कोई पछतावा नहीं होना चाहिए था। मुझे बस अच्छा थ्रो करना था।”
ग्लासगो में भारत के लिए एथलेटिक्स में चौथा पदक जीतने के बाद सीमा ने अब अपना ध्यान इस साल के अंत में होने वाले एशियन गेम्स पर लगा दिया है। उन्होंने कहा, “हम एशियन गेम्स में और भी बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगे। वहां हो सकता है कि पदक का रंग भी बदल जाए।”







