Education Minister takes major action; six officials face the axe.

पटना: बिहार शिक्षा विभाग में लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सख्त कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने विभागीय कार्यों में गंभीर अनियमितता, कर्तव्य के प्रति उदासीनता और भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते छह अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई 8 मई 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। शिक्षा मंत्री ने बताया कि बांका के तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) सह जिला कार्यक्रम पदाधिकारी पवन कुमार के खिलाफ कार्यों में लापरवाही बरतने के आरोप में कार्रवाई की गई है। वर्तमान में वे पूर्वी चंपारण में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।

वहीं भोजपुर के तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान) मोहम्मद इरशाद अंसारी पर वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप पाए गए हैं। विभाग ने उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करते हुए सेवा से बर्खास्त करने की अनुशंसा भी की है। इसके अलावा बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के तत्कालीन सचिव राजेश कुमार पर कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरतने का आरोप लगा है। सुपौल के तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी रामाशीष महतो पर शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप में विभागीय कार्रवाई की गई है। बांका के तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी और वर्तमान में सेवानिवृत्त हो चुके देवेंद्र कुमार झा भी विभागीय जांच के दायरे में आए हैं। उन पर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं। कार्रवाई की जद में आई अधिकारियों की सूची में एक महिला अधिकारी भी शामिल हैं।

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मधुबनी जिले के मधेपुर प्रखंड की प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) मरजीना खातून पर विद्यालय परित्याग प्रमाण पत्र (स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट) पर प्रतिहस्ताक्षर करने के बदले अवैध राशि लेने का आरोप है। विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया है। उनका निलंबन 18 मई 2026 से प्रभावी माना जाएगा। शिक्षा विभाग के अनुसार संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के आधार पर विभिन्न प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई की गई है। कुछ अधिकारियों के मामले में वेतन और पेंशन में कटौती के साथ-साथ भविष्य की वेतन वृद्धि पर रोक लगाने की भी अनुशंसा की गई है। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।