Bharat Bandh impact: Labour-farmer strike paralyses life in several states

नयी दिल्ली: केंद्रीय श्रमिक संगठनों और किसान समूहों के आह्वान पर आयोजित भारत बंद का देश के कई हिस्सों में व्यापक असर देखने को मिला। दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा बुलाए गए इस राष्ट्रव्यापी बंद को विभिन्न किसान संगठनों, छात्र और युवा समूहों का भी समर्थन प्राप्त हुआ। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि केंद्र सरकार की नीतियां मजदूरों और किसानों के हितों के विपरीत तथा कॉरपोरेट क्षेत्र के पक्ष में हैं।

हड़ताल के दौरान चार श्रम संहिताओं को वापस लेने, बिजली संशोधन विधेयक 2025 और बीज विधेयक 2025 को रद्द करने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने और न्यूनतम वेतन की कानूनी गारंटी सुनिश्चित करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई। इसके अलावा मनरेगा के लिए अधिक बजट, आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में कमी और नई परमाणु परियोजनाओं पर रोक की मांग भी की गई।

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केरल में बंद का सबसे अधिक असर दिखाई दिया, जहां सरकारी और निजी बस सेवाएं लगभग ठप रहीं। कार्यालयों में उपस्थिति कम रही, हालांकि कोच्चि मेट्रो और ऑनलाइन टैक्सी सेवाएं चालू रहीं। तमिलनाडु-केरल अंतरराज्यीय बस सेवा भी बाधित रही, जिससे यात्रियों को परेशानी हुई। ओडिशा और पंजाब में भी प्रदर्शन और रैलियां आयोजित की गईं। बालासोर में कुछ समय के लिए रेल सेवा प्रभावित हुई, जिसे प्रशासन ने नियंत्रित किया।

वहीं पश्चिम बंगाल में बंद का असर अपेक्षाकृत सीमित रहा और अधिकांश सेवाएं सामान्य रहीं। संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने भी बंद के समर्थन में प्रदर्शन किया और सरकार से नीतियों पर पुनर्विचार की मांग की।

श्रमिक संगठनों का दावा है कि करोड़ों लोग इस आंदोलन से जुड़े हैं। यह बंद रोजगार, मजदूरी और कृषि से जुड़े मुद्दों पर व्यापक राष्ट्रीय बहस का संकेत माना जा रहा है।