भोपाल (मध्यप्रदेश): मध्यप्रदेश में नगर निगम और सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से राजधानी भोपाल सहित कई शहरों की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो गई है। लगातार तीन दिनों से कचरा नहीं उठाए जाने के कारण भोपाल की सड़कों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में करीब 2,550 टन कचरा जमा हो गया है। चार इमली, श्यामला हिल्स, 74 बंगले, मंत्रालय के आसपास, अटल पथ और कोलार रोड जैसे प्रमुख इलाकों में कचरे के ढेर लग गए हैं। इसका असर जलप्रदाय व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है।
कर्मचारी वेतन 10,500 रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने, अनुकंपा नियुक्ति सहित चार मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के प्रदेश मंत्री वसी सुल्तान के अनुसार, नगर निगम में करीब सात हजार कर्मचारी 25 दिवसीय वेतन पर काम करते हैं। उनका कहना है कि मौजूदा वेतन में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल है। इसी वजह से वेतन वृद्धि की मांग की जा रही है।
हड़ताल के कारण शहर में कचरा संग्रहण के लिए तैनात 400 से अधिक गाड़ियां गार्बेज स्टेशनों पर खड़ी हैं। सामान्य दिनों में भोपाल से प्रतिदिन लगभग 850 टन कचरा निकलता है। नगर निगम के 17 गार्बेज स्टेशनों से कचरा कैप्सूल टैंकरों के जरिए आदमपुर छावनी भेजा जाता है, लेकिन सफाई कार्य बंद होने से पूरी व्यवस्था प्रभावित है।
सफाईकर्मियों के समर्थन में 25 दिवसीय वेतनभोगी कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल हो गए हैं। इससे नगर निगम मुख्यालय सहित सभी 85 वार्डों और 21 जोन में कामकाज प्रभावित हुआ है। यूनियन के अनुसार, कंप्यूटर ऑपरेटर, लिपिक, जलप्रदाय, अग्निशमन, विद्युत, उद्यान और अन्य विभागों के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हैं। आंदोलन के दौरान निगम मुख्यालय की बिजली आपूर्ति बंद किए जाने और ताला लगाए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
जलप्रदाय पर असर के तहत कुछ क्षेत्रों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति बंद रही और कई स्थानों पर नल नहीं खोले गए। हालांकि, कुछ जगह वाल्व खुलने से फिलहाल बड़े स्तर पर जलसंकट नहीं हुआ है। हड़ताल का असर शिवपुरी और विदिशा सहित अन्य शहरों में भी दिख रहा है।
इस बीच सिरोंज में विधायक उमाकांत शर्मा और राजगढ़ के खिलचीपुर में स्थानीय दुकानदार दिनेश कुमार नामदेव ने स्वयं सड़क पर झाड़ू लगाकर सफाई की। अब नगर निगम प्रशासन और कर्मचारी संगठनों के बीच प्रस्तावित बातचीत पर नजर है।







