सूरजपुर में अडानी के पावर प्लांट पर कांग्रेस का विरोध, सरकार से पूछे सवाल
Congress protests against Adani’s power plant in Surajpur, poses questions to the government

रायपुर: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में अडानी समूह की प्रस्तावित 4,800 मेगावाट क्षमता वाली सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत परियोजना को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस परियोजना को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए भूमि, वन क्षेत्र, जल उपलब्धता और पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रदेश के जल, जंगल और जमीन को अडानी समूह के हवाले करने की तैयारी कर रही है।

दीपक बैज ने कहा कि प्रस्तावित कोयला आधारित ताप विद्युत परियोजना के लिए कुल 673.5 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है, जबकि कंपनी के पास फिलहाल केवल 465.92 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध है। शेष 207.58 हेक्टेयर भूमि वन क्षेत्र में आती है। उनका दावा है कि संबंधित वन भूमि के डायवर्सन के लिए कंपनी ने अब तक आवेदन नहीं किया है, इसके बावजूद पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

GNSU Admission Open 2026

उन्होंने परियोजना के प्रस्तावित स्थान पर भी आपत्ति जताई। बैज के अनुसार, यह परियोजना गुम्गा, चिरवान और मुड़गांव जैसे संरक्षित वन क्षेत्रों के साथ-साथ सलका और नारायणपुर गांवों के नजदीक प्रस्तावित है। इसके अलावा, आसपास के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से इसकी दूरी महज 150 से 250 मीटर बताई गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि आबादी और संरक्षित वन क्षेत्रों के इतने करीब परियोजना स्थापित करने की जरूरत क्यों है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने परियोजना की जल आवश्यकता को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि संयंत्र के संचालन के लिए प्रतिवर्ष लगभग 84 मिलियन घन मीटर पानी की जरूरत होगी, लेकिन इसकी आपूर्ति के स्रोत को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि इसके लिए हसदेव बांगो जलाशय से पानी लिया जा सकता है।

बैज ने कहा कि हसदेव बांगो जलाशय क्षेत्र के किसानों के लिए सिंचाई का प्रमुख स्रोत है। यदि इसका पानी औद्योगिक परियोजना को दिया जाता है, तो कृषि और किसानों की जरूरतें प्रभावित हो सकती हैं।

उन्होंने ग्रामसभा की सहमति, वन भूमि के हस्तांतरण और जल आपूर्ति की व्यवस्था स्पष्ट किए बिना पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर सवाल उठाए। कांग्रेस ने परियोजना का विरोध करते हुए कहा कि वन, जल संसाधनों और स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पार्टी ने इन मुद्दों पर अपना विरोध जारी रखने की बात कही है।