
नयी दिल्ली: केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना के तहत भर्ती होने वाले अग्निवीरों के लिए सेवा अवधि को लेकर बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के अनुसार, चार साल का शुरुआती कार्यकाल पूरा करने के बाद अग्निवीरों को दो साल की अतिरिक्त सेवा का अवसर मिल सकेगा। इस तरह वे कुल छह साल तक सेना में अपनी सेवाएं दे सकेंगे। इसके साथ ही अतिरिक्त कार्यकाल पूरा करने के बाद नियमित सैनिक बनने का रास्ता भी उनके लिए खुला रहेगा। हालांकि, इसके लिए निर्धारित चयन प्रक्रिया और पात्रता मानदंडों को पूरा करना अनिवार्य होगा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने इस फैसले की जानकारी दी। सरकार के इस कदम को अग्निवीरों के लिए सेना में लंबे समय तक सेवा देने का अतिरिक्त अवसर माना जा रहा है।
दरअसल, जून 2022 में शुरू की गई अग्निपथ योजना के तहत युवाओं को चार साल के लिए सेना में भर्ती करने का प्रावधान था। इस योजना के अंतर्गत कुल अग्निवीरों में से 25 प्रतिशत को उनकी योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर नियमित कैडर में शामिल किया जा सकता था। वहीं, शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को चार साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद सेवा से मुक्त होना पड़ता था।
नई व्यवस्था में इसी प्रावधान को लेकर बदलाव किया गया है। अब नियमित कैडर में शामिल नहीं होने वाले अग्निवीरों को उनकी सहमति के आधार पर दो साल का अतिरिक्त सेवा अवसर दिया जाएगा। इस अवधि के दौरान उन्हें पहले की तुलना में बेहतर वेतन और सेवा संबंधी लाभ मिलने की बात कही गई है।
सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब अग्निपथ योजना के पहले बैच के लगभग 18,300 अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल पूरा होने वाला है। ऐसे में नई व्यवस्था से उन युवाओं को अतिरिक्त समय तक सेना में सेवा देने का अवसर मिल सकता है।
हालांकि, छह साल की सेवा पूरी करने का मतलब स्वतः नियमित सैनिक बन जाना नहीं है। नियमित कैडर में शामिल होने के लिए अग्निवीरों को निर्धारित चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा और जरूरी मानदंडों पर खरा उतरना होगा।
इस बदलाव के बाद अग्निपथ योजना के तहत भर्ती होने वाले युवाओं के सामने सेना में सेवा जारी रखने का एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होगा।






