
चंडीगढ़: पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल को किसान संगठनों का समर्थन मिलने लगा है। भारतीय किसान यूनियन (कादियां) ने आगामी विधानसभा चुनाव में अकाली दल को बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा की है। संगठन के अध्यक्ष हरमीत सिंह कादियां ने सोमवार को चंडीगढ़ में पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की मौजूदगी में यह ऐलान किया।
हरमीत सिंह कादियां ने बताया कि संगठन ने समर्थन का फैसला लेने से पहले तीन महीने तक विभिन्न राजनीतिक दलों के किसान हितों से जुड़े एजेंडे और उनके कार्यों का मूल्यांकन किया। उन्होंने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पर किसानों की समस्याओं को लेकर निराशाजनक रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
कादियां ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने किसान संगठन के साथ हुए लिखित समझौते का पालन नहीं किया। उन्होंने किसान कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को मुआवजा नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, पिछले साल आई बाढ़ और छह महीने से अधिक समय पहले हुई ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है।
इस मौके पर किसान यूनियन ने सुखबीर सिंह बादल को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन भी सौंपा। इसमें अटारी-वाघा सीमा को व्यापार के लिए खोलने, फसल विविधीकरण और खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने तथा गेहूं और धान के अलावा अन्य फसलों पर भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने की मांग की गई है। इसके साथ ही फसल बीमा योजना लागू करने और पंजाब में बाहरी लोगों द्वारा जमीन खरीदने पर रोक लगाने की मांग भी शामिल है।
सुखबीर सिंह बादल ने किसान यूनियन के समर्थन के लिए हरमीत सिंह कादियां का आभार जताया। उन्होंने अन्य किसान और मजदूर संगठनों से भी अकाली दल का समर्थन करने की अपील की। बादल ने कहा कि यदि राज्य में अकाली दल की सरकार बनती है तो किसान संगठन की मांगों के समाधान के लिए कदम उठाए जाएंगे।
बादल ने दावा किया कि अकाली दल ने किसानों के कल्याण के लिए अन्य राजनीतिक दलों की तुलना में अधिक काम किया है। उन्होंने आम आदमी पार्टी के विधायकों के पार्टी छोड़ने की संभावना जताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान के धुरी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हारने का भी दावा किया। उन्होंने कहा कि अकाली दल की सरकार बनने पर राज्य के संसाधनों का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।






