इजरायल चुनाव: नेतन्याहू की लिकुड सबसे बड़ी पार्टी, बहुमत से दूर गठबंधन
Israel Elections: Netanyahu’s Likud is the largest party; coalition falls short of a majority

तेल अवीव: इजरायल में संसदीय चुनाव के बाद राजनीतिक अनिश्चितता गहरा गई है। शुरुआती एग्जिट पोल के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी एकल पार्टी बनकर उभर सकती है, लेकिन उनके नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन को सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत मिलने की संभावना कम है। पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को कुल सीटों के मामले में बढ़त मिलने का अनुमान है।

चैनल 12, चैनल 13 और सार्वजनिक प्रसारक ‘कान’ के एग्जिट पोल के मुताबिक, 120 सदस्यीय नेसेट में नेतन्याहू के गठबंधन को लगभग 50 सीटें मिल सकती हैं, जबकि विपक्षी गठबंधन को 52 से 53 सीटें मिलने का अनुमान है। अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को 17 से 18 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। सरकार बनाने के लिए किसी भी गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन चाहिए।

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हालांकि, ‘आई24न्यूज’ के अलग एग्जिट पोल में नेतन्याहू के गठबंधन को 55 सीटें और आइजेनकोट के गठबंधन को 49 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। इन अलग-अलग आंकड़ों से स्पष्ट है कि अंतिम नतीजों तक सत्ता का समीकरण अनिश्चित बना रह सकता है।

लिकुड को चुनौती, अरब पार्टियों की भूमिका अहम

एग्जिट पोल के अनुसार, लिकुड को 24 से 27 सीटें मिल सकती हैं, जबकि आइजेनकोट की मध्यमार्गी ‘याशार’ पार्टी को 20 से 23 सीटें मिलने का अनुमान है। नफ्ताली बेनेट के गठबंधन और यायर गोलान की ‘डेमोक्रेट्स’ पार्टी को भी विपक्षी खेमे में महत्वपूर्ण समर्थन मिलने की संभावना है।

अरब नेतृत्व वाली पार्टियों का प्रदर्शन सरकार गठन की बातचीत में निर्णायक साबित हो सकता है। हालांकि, ये दल विपक्षी गठबंधन का औपचारिक हिस्सा नहीं हैं और नेतन्याहू तथा आइजेनकोट दोनों ने इनके साथ औपचारिक गठबंधन से इनकार किया है। इसके बावजूद, बाहरी समर्थन या विश्वास मत के दौरान मतदान से दूर रहने का उनका फैसला सरकार बनाने के समीकरण को प्रभावित कर सकता है।

गठबंधन वार्ता के लंबे दौर के आसार

आइजेनकोट ने एग्जिट पोल को नेतन्याहू सरकार के प्रति जनता के घटते भरोसे का संकेत बताया है। वहीं, नेतन्याहू के समर्थकों का कहना है कि लिकुड अब भी देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में सरकार गठन के लिए लंबी बातचीत करनी पड़ सकती है। यदि कोई भी पक्ष बहुमत जुटाने में नाकाम रहता है, तो इजरायल में दोबारा चुनाव कराने की संभावना भी बन सकती है। हालांकि, एग्जिट पोल केवल शुरुआती अनुमान हैं और अंतिम परिणामों से इनमें बदलाव संभव है।