पेरिस: फ्रांस की सीनेट ने कोर्सिका द्वीप को फ्रांसीसी गणराज्य के भीतर स्वायत्तता देने से जुड़े संवैधानिक विधेयक को खारिज कर दिया है। इस फैसले से द्वीप को विशेष संवैधानिक दर्जा दिलाने की कोशिशों को झटका लगा है। संसद के उच्च सदन में विधेयक के पक्ष में 134 सीनेटरों ने मतदान किया, जबकि 181 सदस्यों ने इसके विरोध में वोट दिया।
सीनेट ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि सदन ने उस संवैधानिक कानून के मसौदे को मंजूरी नहीं दी, जिसे फ्रांस की नेशनल असेंबली पहले ही स्वीकृति दे चुकी थी।
स्वायत्तता समर्थकों को झटका
समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, विधेयक खारिज होने के बाद कोर्सिका को स्वायत्तता देने के समर्थकों की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। हाउट-कोर्स विभाग का प्रतिनिधित्व करने वाले सीनेटर पॉल-टूसैं परिगी ने घोषणा की कि स्वायत्तता समर्थक पक्ष इस मुद्दे पर फ्रांसीसी अधिकारियों के साथ चल रही बातचीत से पीछे हट रहा है।
इस घटनाक्रम से कोर्सिका के भविष्य के संवैधानिक दर्जे को लेकर फ्रांस की केंद्र सरकार और द्वीप के नेताओं के बीच जारी चर्चा पर असर पड़ने की संभावना है। हालांकि, आगे की राजनीतिक प्रक्रिया और बातचीत की दिशा को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
मैक्रों ने किया था विशेष दर्जे का समर्थन
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सितंबर 2023 में संविधान में कोर्सिका के लिए विशेष दर्जे का प्रावधान शामिल करने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने द्वीप को स्वायत्तता देने का समर्थन किया था, लेकिन स्पष्ट किया था कि इसका अर्थ फ्रांस से स्वतंत्रता देना नहीं होगा।
मैक्रों ने कोर्सिका के नेताओं से केंद्र सरकार के साथ मिलकर छह महीने तक काम करने और ऐसा समझौता तैयार करने को कहा था, जिसे प्रस्तावित संवैधानिक कानून का आधार बनाया जा सके। इस प्रक्रिया के बाद विधेयक को संसद के निचले सदन ने मंजूरी दे दी थी।
स्वतंत्रता नहीं, स्वायत्तता थी प्रस्ताव का उद्देश्य
कोर्सिका को स्वायत्तता देने की पहल का मकसद फ्रांस के भीतर रहते हुए द्वीप को कुछ विशेष संवैधानिक अधिकार प्रदान करना था। हालांकि, सीनेट में विधेयक के विरोध में अधिक मत पड़ने के कारण इसे आगे बढ़ाने का रास्ता फिलहाल बंद हो गया है।
इस फैसले के बाद कोर्सिका की स्वायत्तता के समर्थकों और फ्रांसीसी अधिकारियों के बीच राजनीतिक सहमति बनाना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।







