BRICS देशों से वैश्विक दक्षिण की आकांक्षाएं पूरी करने का आह्वान
Call for BRICS nations to fulfill the aspirations of the Global South

नयी दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ब्रिक्स सदस्य देशों से वैश्विक दक्षिण के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र की 75 वर्षों की यात्रा की सफलता लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती और जनता की भागीदारी का प्रमाण है। उन्होंने जन-केंद्रित विकास को बढ़ावा देने में संसदों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी जोर दिया।

12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का उद्घाटन

ओम बिरला ने संसद भवन परिसर स्थित संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। वह इस मंच के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में ब्रिक्स सदस्य देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों की उपस्थिति और उनके साझा संकल्प एक महत्वपूर्ण अवसर हैं।

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उन्होंने उम्मीद जताई कि सम्मेलन के माध्यम से सदस्य देशों के बीच संसदीय सहयोग मजबूत होगा और साझा चुनौतियों से निपटने के लिए विचारों का आदान-प्रदान किया जा सकेगा।

वैश्विक मंच पर ब्रिक्स की बढ़ती भूमिका

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि ब्रिक्स संसदीय मंच के गठन के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस अवधि में संगठन का विस्तार हुआ है और वैश्विक घटनाक्रम तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करने की इसकी क्षमता बढ़ी है।

बिरला के अनुसार, ब्रिक्स दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और इसके सदस्य देशों का विस्तार विश्व के करीब एक-तिहाई भूभाग पर है। ऐसे में संगठन की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने सदस्य देशों से वैश्विक दक्षिण के लोगों की जरूरतों और अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए साझा प्रयास करने की अपील की।

11 सदस्य और 10 साझेदार देशों की भागीदारी

दो दिवसीय 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच सम्मेलन में 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन का मुख्य विषय ‘जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को मजबूत बनाना’ है।

इस मंच पर संसदों की कार्यक्षमता बढ़ाने, लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त करने और विकास प्रक्रिया में आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है।

सम्मेलन से सदस्य और साझेदार देशों के बीच संवाद, सहयोग तथा संसदीय संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, वैश्विक दक्षिण के विकास से जुड़े मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर भी मिलेगा।