मेलिम, मेघालय: मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने कहा है कि मेघालय के शहद में वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बनाने की अपार संभावनाएं हैं। वैज्ञानिक तरीके से उत्पादन, बेहतर प्रसंस्करण, आकर्षक पैकेजिंग और प्रभावी ब्रांडिंग के जरिए इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाया जा सकता है। उन्होंने राज्य के जैविक शहद को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री मंगलवार को दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स जिले के रेरापारा ब्लॉक के मेलिम में ‘एपिकल्चर मल्टी फैसिलिटी सेंटर सह प्रोसेसिंग यूनिट’ का उद्घाटन करने के बाद संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सरकार राज्य में मधुमक्खी संग्रहालय एवं केंद्र स्थापित करने की संभावना पर भी विचार कर रही है। प्रस्तावित केंद्र में जैविक शहद की बिक्री के साथ शहद उत्पादन से संबंधित डिजिटल जानकारी उपलब्ध कराने की योजना है।
संगमा ने कहा कि नया केंद्र मधुमक्खी पालकों को वैज्ञानिक उत्पादन, तकनीकी प्रशिक्षण, शहद के मूल्य संवर्धन और बाजार तक पहुंच बनाने में मदद करेगा। इससे मधुमक्खी पालन को व्यवस्थित ग्रामीण उद्यम के रूप में विकसित करने और किसानों की आय के नए अवसर पैदा करने में सहायता मिलेगी।
उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए केवल मधुमक्खी के बक्से वितरित करना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ कॉलोनी प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और संगठित विपणन व्यवस्था को भी मजबूत करना जरूरी है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में ‘मधुमक्खी मिशन 2.0’ तीन चरणों में लागू किया जा रहा है। इसके तहत मेघालय के सभी 12 जिलों में 87 क्लस्टरों और 6,491 मधुमक्खी पालकों को शामिल किया गया है। मिशन के अंतर्गत 32,455 मधुमक्खी बक्से और 6,491 उपकरण सेट उपलब्ध कराए गए हैं। प्रत्येक लाभार्थी को पांच बक्से और एक उपकरण सेट दिया गया है।
उन्होंने बताया कि मिशन के तीसरे चरण के अंतर्गत आने वाले 39 क्लस्टरों ने वर्ष 2024-25 में 157.69 टन शहद का उत्पादन किया। इसके अलावा, उत्तर गारो हिल्स जिले के संब्रक में प्रशिक्षण, परीक्षण, प्रसंस्करण, भंडारण और खुदरा बिक्री जैसी सुविधाओं से युक्त एकीकृत मधुमक्खी विकास केंद्र स्थापित किया गया है।
मेलिम में स्थापित नई इकाई की लागत लगभग 1.52 करोड़ रुपये है। यह केंद्र कच्चे शहद के संग्रह, प्रसंस्करण, बॉटलिंग, परीक्षण, विपणन और मधुमक्खी बक्सों के निर्माण में सहयोग करेगा।
संगमा ने विश्वास जताया कि उचित तकनीक और बाजार व्यवस्था के सहयोग से मेघालय का जैविक शहद ग्रामीण रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ राज्य को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला सकता है।







