तिरुवनंतपुरम। केरल सरकार राज्य में सड़क यातायात का 50 प्रतिशत तक हिस्सा समुद्री मार्गों पर स्थानांतरित करने की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन ने विधानसभा में ‘केरल मैरीटाइम बोर्ड (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश करते हुए यह बात कही। उन्होंने बताया कि समुद्री परिवहन को बढ़ावा देने से माल ढुलाई की लागत कम करने और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रस्तावित ‘मिशन समुद्र’ के तहत समुद्री मार्ग से माल ढुलाई का खर्च सड़क परिवहन की लागत का लगभग एक-तिहाई रह सकता है। इस पहल का उद्देश्य केरल को एकीकृत समुद्री परिवहन और बंदरगाह आधारित आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करना है।
बंदरगाहों को जोड़ने पर जोर
मिशन समुद्र के तहत राज्य के बंदरगाहों को आपस में जोड़ने की योजना है। इसके साथ ही तटीय जहाजरानी, अंतर्देशीय जल परिवहन, बंदरगाह आधारित उद्योग, समुद्री पर्यटन और जहाज निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे परिवहन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि केरल के पास करीब 600 किलोमीटर लंबी तटरेखा, दो अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह, एक कंटेनर टर्मिनल और 18 छोटे बंदरगाह हैं। ये सुविधाएं राज्य में समुद्री परिवहन और इससे जुड़े उद्योगों के विकास की व्यापक संभावनाएं प्रदान करती हैं।
तटीय जहाजरानी और क्रूज पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
योजना के शुरुआती चरण में तटीय जहाजरानी के माध्यम से तेल, गैस, रसायनों और खतरनाक पदार्थों की ढुलाई पर ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा, सरकार कोच्चि और कोझिकोड में क्रूज टर्मिनल स्थापित करने की योजना बना रही है।
प्रस्तावित क्रूज नेटवर्क के जरिए केरल को दुबई, मालदीव, श्रीलंका और गोवा से जोड़ने की योजना है। इससे समुद्री पर्यटन को बढ़ावा मिलने और पर्यटकों के लिए यात्रा के नए विकल्प विकसित होने की उम्मीद है।
आगे चलकर इस नेटवर्क को राज्य की 44 नदियों से जोड़कर नदी आधारित क्रूज पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे केरल के तटीय और नदी क्षेत्रों में पर्यटन संबंधी गतिविधियों के विस्तार की संभावना है।
कुल मिलाकर, मिशन समुद्र के जरिए केरल सरकार समुद्री परिवहन की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करना चाहती है। हालांकि, सड़क यातायात का 50 प्रतिशत हिस्सा समुद्री मार्गों पर स्थानांतरित करने का लक्ष्य योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और जरूरी बुनियादी ढांचे के विकास पर निर्भर करेगा।







