मेघालय में 4,000 शिक्षकों की हड़ताल, योजना 2026 रद्द करने की मांग
4,000 teachers on strike in Meghalaya; demand cancellation of 2026 plan.

शिलांग: मेघालय में राज्य सरकार से वित्तीय अनुदान प्राप्त करने वाले स्कूलों के करीब 4,000 शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर तीन दिवसीय सामूहिक आकस्मिक अवकाश आंदोलन शुरू कर दिया है। इस आंदोलन से राज्य के अनुदान प्राप्त स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका है।

इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान खासी जयंतिया डेफिसिट स्कूल टीचर्स एसोसिएशन (KJDSTA) और गारो हिल्स डेफिसिट स्कूल टीचर्स एंड एम्प्लॉइज एसोसिएशन ने किया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि सरकार की ओर से उनकी मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।

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शिक्षकों की प्रमुख मांगों में योजना 2026 को रद्द करना और बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज को बहाल करना शामिल है। संगठनों का आरोप है कि सरकार ने उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेने के बजाय योजना को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने को कहा है।

खासी जयंतिया डेफिसिट स्कूल टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बॉसवेल पाला के अनुसार, शिक्षकों ने 25 सितंबर को मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखी थीं। इसके जवाब में शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव डी. लिंगदोह ने पत्र जारी किया था।

पाला ने कहा कि सरकार ने योजना 2026 को वापस लेने पर सहमति जताने के बजाय शिक्षकों को स्थायी सेवानिवृत्ति खाता संख्या (PRAN) के लिए पंजीकरण कराने को कहा है। यह खाता राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली से संबंधित है। शिक्षक संगठनों की आपत्ति योजना के क्रियान्वयन और उससे जुड़े प्रावधानों को लेकर है।

बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के मुद्दे पर पाला ने बताया कि सरकार ने अप्रैल में गठित बोर्ड में डेफिसिट स्कूलों के शिक्षकों को शामिल करने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, शिक्षक संगठनों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। वे बोर्ड की बहाली को लेकर अपनी मांग पर कायम हैं।

पाला ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग के जवाब में ज्ञापन में उठाए गए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी गई। उन्होंने शिक्षकों से आंदोलन का समर्थन करने की अपील की। साथ ही अभिभावकों और विद्यार्थियों से विरोध प्रदर्शन के पीछे के कारणों को समझने का आग्रह किया।

अब इस आंदोलन के बीच शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठनों के बीच आगे की बातचीत तथा सरकार के रुख पर नजर रहेगी। मांगों का समाधान निकलने से स्कूलों में सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां बहाल करने का रास्ता साफ हो सकता है।