मुंबई: घरेलू शेयर बाजार में पिछले सप्ताह दर्ज तेजी के बाद आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर प्रमुख कंपनियों के तिमाही वित्तीय नतीजों और खुदरा एवं थोक महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी। एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा, विप्रो, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसी प्रमुख कंपनियों के परिणाम बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा पश्चिम एशिया की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित करेंगे।
बीते सप्ताह घरेलू शेयर बाजार में तीन कारोबारी सत्रों में तेजी रही, जबकि दो सत्रों में गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद सप्ताह के अंत में प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए।
बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स सप्ताह के दौरान 562.63 अंक यानी 0.78 प्रतिशत चढ़कर 72,472.33 अंक पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी-50 सूचकांक 98.50 अंक यानी 0.44 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त के साथ 22,520.45 अंक पर पहुंच गया।
हालांकि, बाजार के सभी वर्गों में समान तेजी नहीं रही। मझौली कंपनियों का निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 0.32 प्रतिशत गिर गया, जबकि छोटी कंपनियों के स्मॉलकैप-100 सूचकांक में 0.50 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
ट्रेंट के शेयर में सबसे ज्यादा तेजी
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 15 के शेयरों में साप्ताहिक तेजी रही, जबकि 15 कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। सकारात्मक तिमाही आंकड़ों के बीच टाटा समूह की खुदरा कंपनी ट्रेंट का शेयर 12.42 प्रतिशत चढ़कर सबसे अधिक लाभ में रहा।
कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर में 4.84 प्रतिशत, टीसीएस में 4.03 प्रतिशत, भारती एयरटेल में 3.77 प्रतिशत और आईसीआईसीआई बैंक में 3.72 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। एक्सिस बैंक का शेयर 3.71 प्रतिशत, आईटीसी का 3.58 प्रतिशत और इटरनल का शेयर 3.14 प्रतिशत मजबूत हुआ।
बीईएल और टाटा स्टील में गिरावट
दूसरी ओर, बीईएल का शेयर 3.91 प्रतिशत टूटकर प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शीर्ष पर रहा। टाटा स्टील में 3.07 प्रतिशत, सन फार्मा में 2.93 प्रतिशत, टाइटन में 2.84 प्रतिशत और एशियन पेंट्स में 2.55 प्रतिशत की गिरावट आई। एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर भी 2.34 प्रतिशत कमजोर हुआ।
आने वाले सप्ताह में निवेशक कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन, महंगाई के आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर नजर रखेंगे। कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी घरेलू बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती हैं।







