श्रीगंगानगर: राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के पदमपुर क्षेत्र में 40 फुट गहरे खुले बोरवेल में गिरी नीलगाय को करीब 16 घंटे की मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस दौरान नीलगाय पूरी रात बोरवेल में फंसी रही। ग्रामीणों, किसानों और वन्यजीव प्रेमियों की सूचना के बाद वन विभाग की टीमों ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान चलाया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना पदमपुर क्षेत्र के चक 4 सीसी में एक मोघे के पास हुई। शुक्रवार शाम एक नीलगाय चलते समय अचानक खुले बोरवेल में गिर गई। घटना का पता चलते ही आसपास मौजूद किसानों और ग्रामीणों ने उसे बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन बोरवेल की गहराई अधिक होने के कारण वे सफल नहीं हो सके। इसके बाद वन विभाग को सूचना दी गई।
ग्रामीणों के अनुसार, सबसे पहले रायसिंहनगर वन विभाग के रेंजर को घटना की जानकारी दी गई थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रेंजर ने मौके पर पहुंचने के बजाय घटनास्थल को श्रीगंगानगर वन विभाग के क्षेत्राधिकार में बताते हुए जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की। इस कथित क्षेत्राधिकार विवाद के कारण बचाव कार्य शुरू होने में देरी को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई।
इस बीच नीलगाय पूरी रात बोरवेल में फंसी रही और बाहर निकलने के लिए छटपटाती रही। घटना की गंभीरता को देखते हुए मामला संभागीय वन अधिकारी (डीएफओ), श्रीगंगानगर तक पहुंचाया गया। इसके बाद डीएफओ ने तत्काल कार्रवाई करते हुए रायसिंहनगर और श्रीगंगानगर वन विभाग की टीमों को मौके पर भेजने के निर्देश दिए।
दोनों क्षेत्रों की वन विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर संयुक्त रूप से बचाव अभियान चलाया। काफी मशक्कत के बाद ट्रैक्टर की मदद से नीलगाय को बोरवेल से बाहर निकाला गया। करीब 16 घंटे तक चले इस अभियान के बाद नीलगाय को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता मिली।
घटना ने खुले और असुरक्षित बोरवेल से वन्यजीवों को होने वाले खतरे की ओर ध्यान आकर्षित किया है। ऐसे हादसों को रोकने के लिए खुले बोरवेल को ढकना और उनकी नियमित निगरानी करना जरूरी है। वहीं, ग्रामीणों ने वन विभाग से ऐसी घटनाओं में तत्काल कार्रवाई और विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने की मांग की है।







