केरल की जेलों में भीड़भाड़, बुनियादी सुविधाओं पर उठे सवाल
Overcrowding in Kerala's prisons; questions raised about basic amenities.

तिरुवनंतपुरम। केरल की जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों को रखने, स्वच्छ पेयजल की कमी और शौचालयों की खराब स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तिरुवनंतपुरम निगम पार्षद आर. सुगाथन ने राज्य की जेल व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की है। उन्होंने जेलों में कैदियों को बेहतर आवास, स्वास्थ्य सेवाएं और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए सरकार से तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया है।

सुगाथन को केरल उच्च न्यायालय द्वारा केरल एंटी-सोशल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट (केएएपीए) के तहत उनकी एहतियाती हिरासत रद्द किए जाने के बाद विय्युर सेंट्रल जेल से रिहा किया गया था। रिहाई के बाद उन्होंने जेल के भीतर रहने की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कैदियों की समस्याओं की प्रत्यक्ष जांच की जानी चाहिए। उनके मुताबिक, जेलों में मानवीय परिस्थितियां सुनिश्चित करने के साथ कैदियों को सुधार और पुनर्वास के अवसर भी दिए जाने चाहिए।

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विय्युर सेंट्रल जेल के अपने अनुभव साझा करते हुए सुगाथन ने दावा किया कि वहां लगभग 560 कैदियों के रहने की व्यवस्था के बावजूद करीब 1,200 कैदियों को रखा गया था। उन्होंने कहा कि इतनी अधिक संख्या में कैदियों के रहने से भीड़भाड़ बढ़ गई है और बुनियादी सुविधाओं पर दबाव पड़ रहा है।

जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों की मौजूदगी को लेकर सरकारी आंकड़े भी चिंता दर्शाते हैं। केरल जेल एवं सुधार सेवा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, विय्युर सेंट्रल जेल की स्वीकृत क्षमता 553 कैदियों की थी, जबकि वहां 7 मई 2026 तक 1,080 कैदी रखे गए थे। यह संख्या जेल की निर्धारित क्षमता से लगभग दोगुनी थी।

सुगाथन ने आरोप लगाया कि जेल में समस्याएं केवल जगह की कमी तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने पर्याप्त पीने के पानी, साफ शौचालयों और स्वच्छता व्यवस्था की कमी का भी दावा किया। उनके अनुसार, साफ-सफाई की उचित व्यवस्था नहीं होने से कैदियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है।

उन्होंने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से जेलों की स्थिति की समीक्षा करने, स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार लाने तथा कैदियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने की मांग की। इस मुद्दे ने केरल की जेलों में क्षमता, बुनियादी सुविधाओं और सुधारात्मक व्यवस्था को लेकर बहस को फिर सामने ला दिया है।