UPI पर MDR शुल्क के विरोध में देशभर के व्यापारी करेंगे आंदोलन, 2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’
Traders across the country to protest against MDR charges on UPI; ‘No UPI Day’ on October 2.

जयपुर। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल (बीयूवीएम) ने यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाए जाने के विरोध में देशव्यापी आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है। संगठन के आह्वान पर व्यापारी दो अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ मनाकर डिजिटल भुगतान का बहिष्कार करेंगे। इसके तहत व्यापारी यूपीआई के माध्यम से कोई लेनदेन नहीं करेंगे और शुल्क वापस लेने की मांग उठाएंगे।

बीयूवीएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने बताया कि इस संबंध में संगठन की गवर्निंग बॉडी और देशभर के व्यापारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में यूपीआई पर एमडीआर शुल्क के विरोध में आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई।

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उन्होंने बताया कि दो अक्टूबर को महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। इसके बाद देशभर में व्यापारी ‘नो यूपीआई डे’ मनाकर विरोध दर्ज कराएंगे। संगठन ने अक्टूबर में काला दिवस मनाने और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन करने का भी निर्णय लिया है।

आंदोलन के अगले चरण में दस अक्टूबर को सभी व्यापारिक संस्थाएं अपने-अपने क्षेत्रों में यूपीआई एमडीआर शुल्क के विरोध में धरना-प्रदर्शन करेंगी। बीयूवीएम राष्ट्रीय स्तर पर ज्ञापन तैयार कर विभिन्न व्यापारिक संगठनों को भेजेगा। इसके माध्यम से व्यापारी अपने-अपने सांसदों को ज्ञापन सौंपकर शुल्क वापस लेने की मांग करेंगे।

बाबूलाल गुप्ता ने बताया कि संगठन का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री से मुलाकात कर यूपीआई पर एमडीआर शुल्क समाप्त करने की मांग वाला ज्ञापन सौंपने का प्रयास करेगा। इसके अलावा दिल्ली में देशभर के व्यापारिक संगठनों की बैठक आयोजित कर आंदोलन की आगामी रणनीति तैयार की जाएगी।

संगठन के अनुसार, केंद्र सरकार की अधिसूचना में यूपीआई भुगतान पर 40 पैसे प्रति सौ रुपये की दर से एमडीआर का प्रावधान किया गया है। हालांकि, एक लाख रुपये तक के भुगतान पर शून्य एमडीआर का लाभ दिया गया है। इसके अतिरिक्त रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि संबंधी वस्तुओं के भुगतान पर पांच रुपये प्रति लेनदेन तथा म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों और स्टॉक ब्रोकर से जुड़े भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत एमडीआर निर्धारित किए जाने का उल्लेख किया गया है।

वीडियो कॉन्फ्रेंस में राजस्थान सहित देश के करीब 17 राज्यों के व्यापारिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। व्यापारियों ने शुल्क वापस लेने की मांग करते हुए आंदोलन को व्यापक स्तर पर चलाने के सुझाव दिए।