
तिरुवनंतपुरम। केरल में कोवलम से कासरगोड के बेकल तक 616 किलोमीटर लंबे वेस्ट कोस्ट वाटरवे के विकास कार्यों में तेजी आई है। राज्य सरकार ने इस परियोजना को प्राथमिकता में शामिल किया है। इसके तहत जल परिवहन, पर्यटन और माल ढुलाई को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नहरों का विस्तार, पुलों का पुनर्निर्माण, बोट जेट्टी और टर्मिनल का निर्माण तथा प्रभावित परिवारों का पुनर्वास किया जा रहा है।
परियोजना के पहले चरण के रूप में अक्कुलम-चेतुवा खंड का काम शुरू किया जा चुका है। इसी क्रम में अक्कुलम-कडिनमकुलम मार्ग पर जल्द ही नई नाव सेवा शुरू करने की तैयारी है। इसके अलावा कोवलम-कोल्लम और कोझिकोड-नीलेश्वरम खंडों को राज्य जलमार्ग का दर्जा दिया गया है।
अंतर्देशीय नौवहन विभाग नहरों की चौड़ाई और गहराई बढ़ाने, पुलों के पुनर्निर्माण, नाव जेट्टी एवं कार्गो टर्मिनल विकसित करने तथा जलमार्गों से अतिक्रमण हटाने का काम कर रहा है। परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कडिनमकुलम और तिरुवनंतपुरम क्षेत्रों में नहर विकास से प्रभावित 614 परिवारों को पुनर्वास पैकेज में शामिल किया गया है। अब तक पुनर्वास कार्यों पर 71.87 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
परियोजना के तहत पार्वती पुथनार के विभिन्न हिस्सों का विकास किया जा रहा है। इसके साथ ही करिक्काकम स्टील ब्रिज और सेंट एंड्रयूज ब्रिज के पुनर्निर्माण का काम भी शामिल है। वेली-अराट्टुवाझी और अनाकापिल्ली-चन्ननकरा जैसे जलमार्ग खंडों को नौवहन योग्य बनाया गया है। कोवलम में नए बोट टर्मिनल के निर्माण के लिए लगभग 97 सेंट जमीन का अधिग्रहण भी किया गया है।
राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में चक्का, करिक्काकम, अक्कुलम, स्टेशनकडावु और पल्लीथुरा में पांच बोट जेट्टी के निर्माण के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
सरकार का लक्ष्य इस परियोजना के माध्यम से एकीकृत अंतर्देशीय परिवहन नेटवर्क विकसित करना है। इससे यात्रियों और माल की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के साथ पर्यटन, व्यापार और संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है।






