लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए देश में दोबारा बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में मतदाताओं का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है और उन्हें यह भरोसा होना चाहिए कि उनका वोट उसी प्रत्याशी के पक्ष में दर्ज और मतगणना में शामिल हुआ है, जिसे उन्होंने चुना है।
मायावती ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को अपने मताधिकार का प्रयोग कर सरकार चुनने का अधिकार देता है। संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनावों के संचालन की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग को दी गई है। उन्होंने कहा कि चुनाव व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें मतदाता बिना किसी संदेह के अपनी पसंद के प्रत्याशी को वोट दे सके और उसका मत उसी के पक्ष में गिना जाए।
बसपा प्रमुख ने कहा कि यदि किसी मतदाता को यह आशंका हो कि उसका वोट किसी अन्य प्रत्याशी के पक्ष में चला गया या उसकी गणना नहीं हुई, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास प्रभावित हो सकता है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर स्थिति बताया।
उन्होंने कहा कि देश में शुरुआती चुनावों से लेकर करीब पांच दशक तक बैलेट पेपर के जरिए मतदान होता रहा। उस दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मतपत्रों की गिनती की जाती थी। बाद में मतदान प्रक्रिया में ईवीएम का इस्तेमाल शुरू हुआ।
मायावती ने दावा किया कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब भारतीय जनता पार्टी ने भी ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए थे और मशीनों में छेड़छाड़ की आशंका जताई थी। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद भाजपा ने ईवीएम आधारित व्यवस्था को जारी रखा, जबकि बसपा शुरू से इसका विरोध करती रही है।
उन्होंने दावा किया कि गरीब, श्रमिक, दलित, अति पिछड़े और अन्य वंचित वर्गों के बीच ईवीएम को लेकर आशंकाएं बढ़ी हैं। मायावती ने नगीना लोकसभा सीट का भी उल्लेख करते हुए कहा कि बसपा समर्थकों में वहां के चुनाव परिणाम को लेकर अलग-अलग धारणाएं हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं का भरोसा कायम रखने के लिए ईवीएम के स्थान पर बैलेट पेपर से मतदान कराने पर विचार किया जाना चाहिए।







